Uttar Pradesh : उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने नौकरी के दावे पर खुद कराई अपनी फजीहत

इस समय बेरोजगारी अपने चरम है , जहां देश में बेरोजगारी लगातार बढ़ती जा रही है वहीं सरकार भी अलग-अलग तरीकों से प्रोपेगेंडा लेकर आ रही है। जिसे लेकर सरकार की आलोचना और तेजी से बढ़ रही है।

Uttar Pradesh : उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने नौकरी के दावे पर खुद कराई अपनी फजीहत

इस समय बेरोजगारी अपने चरम है , जहां देश में बेरोजगारी लगातार बढ़ती जा रही है वहीं सरकार भी अलग-अलग तरीकों से प्रोपेगेंडा लेकर आ रही है। जिसे लेकर सरकार की आलोचना और तेजी से बढ़ रही है। 

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार लगातार रोजगार को लेकर अलग-अलग तरह के तरीके से प्रचार कर रही है , कई प्रचार तो ऐसे होते हैं जिसको खबरिया चैनल लगातार सत्य मानकर बड़े जोरों सोरो से चला देते हैं। कुछ रोज पहले ही टाइम्स मैगजीन में एडवर्टाइजमेंट के नाम पर जो चला वह जगजाहिर था। टाइम्स मैगजीन के चौथी और पांचवी पेज पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सबसे अच्छे मुख्यमंत्री के रूप में दिखाया गया था , वह पेज एडवरटाइजमेंट के लिए हुआ करता है उसमें एडवरटाइजमेंट के जरिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सबसे अच्छा मुख्यमंत्री भारत का दिखाया गया।  जिसके बाद खबरिया चैनलों ने लगातार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम के कसीदे पढ़ने लगे। 

अब एक मामला सामने आया है उत्तर प्रदेश में लेखपाल भर्ती को लेकर , जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार में आखरी बार लेखपाल की भर्ती आई थी 2017 में सरकार गिरने और योगी आदित्यनाथ के सरकार आने के बाद किसी भी लेखपाल पद की भर्ती अभी तक नहीं आई है। 
इसके बाद कुछ रोज पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अधिकारी ट्विटर हैंडल से दो वीडियो अपलोड होती है जिसमें यह दावा किया जाता है कि दोनों व्यक्ति को पारदर्शी तरीके से लेखपाल की भर्ती में उन को जगह मिली है और दोनों को अब लेखपाल की नियुक्ति दी जा चुकी है। इसको लेकर लोगों ने सवाल उठाना शुरू किया और योगी आदित्यनाथ को घेरना शुरू कर दिया। 

उसके बाद आनन-फानन में योगी आदित्यनाथ की सोशल मीडिया टीम वीडियो को डिलीट करती है पर अभी तक कोई माफीनामा या फिर सरकार की तरफ से कोई स्टेटमेंट नहीं आया है। 

खबरिया चैनल खामोश रहा पर सोशल मीडिया पर यह वीडियो और स्क्रीनशॉट खूब वायरल होने लगी। जिसके बाद सोशल मीडिया के धुरंधरों ने दोनों व्यक्तियों को खोज निकाला एक व्यक्ति गोरखपुर में मिला जो लेखपाल होने का अपने आपको दावा कर रहा था वह नेपाल भागने में कामयाब रहा वहीं दूसरा व्यक्ति लखनऊ का निकला। 

दरअसल, बीते दिन गुरुवार को सीएम योगी के कार्यालय से संचालित होने वाले आधिकारिक ट्विटर अकाउंट की ओर से एक वीडियो जारी किया गया। वीडियो जारी करते हुए ट्वीट में क्या लिखा गया कि 'सरकारी नौकरी हेतु आयोजित परीक्षाओं के समयबद्ध परिणामों एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया के लिए मुख्यमंत्री श्री  जी महाराज को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए श्री दुर्गेश चौधरी  जी।‘

वीडियो में एक युवक ने अपना नाम दुर्गेश चौधरी  बताते हुए कहा था कि सरकार के द्वारा राजस्व लेखपाल की भर्ती आई, जिसमें हमने लिखित परीक्षा दी और फिर मेरा नाम इंटरव्यू में आ गया। इंटरव्यू के बाद फाइनल रिजल्ट आया जिसके परिणाम में मैं राज्य से लेखपाल पद के लिए चयनित हो गया। 

युवक ने कहा कि इस दरमियान लिखित परीक्षा से लेकर इंटरव्यू तक पूरी निष्पक्षता के साथ सेलेक्शन किया गया था। इसके बाद दुर्गेश ने अपने कार्यकाल का अनुभव साझा करते हुए सरकारी योजनाओं को कल्याणकारी बताने के साथ उत्तर प्रदेश राज्य के मुख्यमंत्री का धन्यवाद दिया।


इस मामले में ट्विस्ट तब आया जब यह स्पष्ट हुआ कि आखिरी बार लेखपालों की भर्ती साल 2015 में हुई थी। तो ऐसे में सवाल उठने लगे कि दुर्गेश चौधरी का चयन कब और कैसे हुआ? जब लेखपाल की भर्ती शुरू हुई थी तो उस समय प्रदेश में अखिलेश सिंह यादव की सरकार थी। 2016 में भर्ती की प्रक्रिया पूरी हुई थी और बीजेपी 2017 में प्रदेश की सत्ता में आई थी।

दुर्गेश चौधरी के वीडियो को मुख्यमंत्री के ऑफिस की ओर से ट्वीट कर चार साल में चार लाख सरकारी नौकरी का दावा किया गया था। ट्वीट होते ही कई लोगों ने इस मुद्दे को पकड़ लिया। अखिलेश सरकार के समय के लेखपाल भर्ती का श्रेय लेने पर लोग योगी सरकार को ट्रोल करने लगे। मामले को बढ़ते देख योगी आदित्यनाथ की ऑफिस की ओर से ट्वीट डिलीट कर दिया गया।