विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण के साथ जीव संरक्षण भी हमारी जिम्मेदारी | World Environment Day 2020

आज देश दुनिया में  विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा  है। इस बार विश्व पर्यावरण दिवस 2020 की थीम ‘जैव-विविधता’ ( ‘Celebrate Biodiversity’ ) है [World Environment Day]

विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण के साथ जीव संरक्षण भी हमारी जिम्मेदारी | World Environment Day 2020
विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण के साथ जीव संरक्षण भी हमारी जिम्मेदारी | World Environment Day 2020

World Environment Day 2020 

दरअसल इस थीम का अर्थ है कि जैव विविधता संरक्षण एवं प्राकृतिक संतुलन होना मानव जीवन के अस्तित्व को बनाये रखने के लिए बहुत ज्यादा जरुरी है इस दिवस को मनाने का फैसला 1972 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन में चर्चा के बाद लिया गया। इस सम्मलेन में इसमें 119 देशों ने भाग लिया और पहली बार एक ही पृथ्वी का सिद्धांत मान्य किया।उक्त गोष्ठी में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने 'पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति एवं उसका विश्व के भविष्य पर प्रभाव' विषय पर व्याख्यान दिया था। पर्यावरण-सुरक्षा की दिशा में यह भारत का प्रारंभिक कदम था। और इसके बाद 5 जून 1974 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया।

इसका मकसद है- लोगों को पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति जागरूक और सचेत करना। प्रकृति बिना मानव जीवन संभव नहीं। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि हम यह समझें कि हमारे लिए पेड़-पौधे, जंगल, नदियां, झीलें, जमीन, पहाड़ कितने जरूरी हैं।

इस बार 2020 अपने साथ काफी मुसीबते ले कोरोना जैसे संकट से देश इस वक्त जूझ रहा है जिसकी वजह से लाकडाउन किया गया और अपने अल्हड़पन से भीड़ में अलग पहचान बनाने वाले बनारसियों के लिए लॉकडाउन अब तक का सबसे मुश्किल भरा दौर था क्यों की बनारस तो जागता हुवा शहर है ये सब बनारसियों को लिए नया था ख़ैर इन सब में एक अच्छी बात हुई पिछले 50 सालों में भी गंगा भी इतनी निर्मल कभी नहीं बहीं।  जीतनी लाकडाउन में पानी का मटमैला रंग अब साफ हो गया है। रंग बदल गया है। वो जलचर भी अब दिखने लगे हैं जिन्हें लुप्त मान लिया गया था।


आंकड़े बताते हैं कि बनारस में गंगा 25 से 30 फीसदी साफ हो चुकी हैं। गंगा के वो जलचर, जो प्रदूषण की भेंट चढ़ते जा रहे थे, सीढि़यों पर तैरने लगे हैं। बीएचयू के नदी वैज्ञानिक प्रो. बीडी त्रिपाठी कहते हैं कि गंगा का पानी साफ हुआ है। लॉकडाउन के बाद गंगा जल में हुए बदलाव का उन्होंने गहन अध्ययन किया है। शायद 50 साल पहले भी बनारस में गंगा इतनी निर्मल नहीं रही होंगी।ये तो सबके लिए बहुत अच्छी बात थी की करोङो रूपए लगा कर सरकार ने इतनी साफ़ गंगा नहीं कर पाई जितना बिना पैसे में आज 5 जून को को हर जगह जोगो को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए तरह तरह के आयोजन नुक्कड नाटक पेड़ लगाए जाएंगे लेकिन आज मन में एक सवाल है क्या सिर्फ हमारी जिम्मेदारी यही तक है क्या सिर्फ हमारा कर्तब्य पर्यावरण तक है जिव संरक्षण भी हमारी ही जिम्मेदारी है दरसअल आज ये बाते कहने का तात्पर्य है की अभी  केरल (Kerala) में एक हथिनी के साथ दुर्व्यवहार का एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है |दरअसल, इस बेजुबा गर्भवती हथिनी को कुछ स्थानीय लोगों ने उसे पटाखों से भरा अनानास खिला दिया था. अनानास मादा हाथी के मुंह में फट गया जिससे वह बुरी तरह से जख्मी हो गई |

ये घटना उत्तरी केरल के मलप्पुरम जिले का है. घटना की जानकारी एक वन अधिकारी ने अपने फेसबुक पेज पर दी. वन अधिकारी मोहन कृष्णन्न ने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट कर बताया कि यह मादा हाथी खाने की तलाश में भटकते हुए जंगल से पास के गांव में आ गई थी. वह गलियों में घूम रही थी. इसके बाद कुछ लोगों ने उसे अनानास खिला दिया जिसमें पटाखे भरे थे. आप सोच लीजिये की इंसान के अंदर मानवता अब जैसे बची नहीं है उस बेजुबा जानवर की बस इतनी गलती थी की वो खाने के तलाश में इंसानो की बस्ती में जा पहुंची जहा इंसानियत नाम की कोई चीज है नहीं थी |