Essential Commodity act: रोजमर्रा के चीजों की कालाबाज़ारी पर केंद्र सरकार की रोक

एसेंशियल कमोडिटी एक्ट के तहत जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी करने वालों को 7 साल की सजा हो सकती है.लॉक डाउन के चलते कुछ वस्तुओं की सप्लाई में कमी देखी गई है. लिहाजा कुछ कमोडिटीज के दाम बढ़ रहे हैं. ऐसे में सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाने, कीमतें तय करने के विकल्प खुले रखने के निर्देश दिए हैं.  READ IT COMPLETELY

Essential Commodity act: रोजमर्रा के चीजों की कालाबाज़ारी पर केंद्र सरकार की रोक
Essential Commodity act: रोजमार्रा के चीजों की काला बाज़ारी पर केंद्रे सरकार की रोक

Essential Commodity act: रोजमर्रा के चीजों की कालाबाज़ारी पर केंद्र सरकार की रोक

कोरोना वायरस  के चलते जहाँ पुरे देश में  lockdown है  और सभी दुकाने बंद तो रोजमर्रा की चीजे खरीदना लोगो के लिए पेरशानी बनती जा रही है.ऐसे जो भी दुकानदार है वो लोगो की पेरशान और lockdown का फायदा उठा रहे है. और समानो को दुगने दामों में बेच रहे है. रोजमर्रा के चीजों के बढ़ते दामों को देखते हुए केंद्र सरकार बड़ा फैसला लेके आई है केंद्र सरकार ने जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग पर रोक लगाने के लिए राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश देते हुए एसेंशियल कमोडिटी एक्ट (Essential Commodity act) लागू करने को कहा है. आपको बता दें कि सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद आटा, दाल (Pulses), बेसन और खाने के तेल (Edible Oil) के दाम के सप्लाई बाधित होने से इनकी कीमतों में इजाफा हो गया है. गेहूं के आटे का भाव बीते एक हफ्ते में पांच रुपये किलो बढ़ गया है, जबकि बेसन के दाम में 10-12 रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ है. खाने के तेल के दाम में पांच रुपये प्रति किलो तक का इजाफा हुआ है.

एसेंशियल कमोडिटी एक्ट के तहत जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी करने वालों को 7 साल की सजा हो सकती है.लॉक डाउन के चलते कुछ वस्तुओं की सप्लाई में कमी देखी गई है. लिहाजा कुछ कमोडिटीज के दाम बढ़ रहे हैं. ऐसे में सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाने, कीमतें तय करने के विकल्प खुले रखने के निर्देश दिए हैं. 

लॉकडाउन का आटा, दाल, खाने के तेल की सप्लाई पर असर हो रहा है. मजदूरों की कमी से जरूरी चीजों की सप्लाई पर असर पड़ रहा है. मजदूरों की कमी से खाने के तेलों की प्रोसेसिंग 40 फीसदी घटी है. फ्लोर मिल्स भी 40-50 फीसदी की क्षमता पर काम कर रही हैं. सप्लाई कम होने से फ्लोर मिल्स के कामकाज पर असर पड़ा है. देश की करीब 70 फीसदी दाल मिलों में कामकाज ठप है. मजदूरों की कमी से रबी फसलों की कटाई पर असर पड़ा है. मंडियां बंद होने से भी खाने-पीने की सप्लाई पर असर पड़ा है.