वोडाफोन आइडिया को राहत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार | ZNDM NEWS |

वोडाफ़ोन आइडिया सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफ़ोन आइडिया की वो याचिका ख़ारिज कर दी है जिसमें 2500 करोड़ रुपये 1000 करोड़ रुपये देने की पेशकश की गई थी| कंपनी ने अपनी याचिका में ये मांग भी की थी कि उसके ख़िलाफ़ कोई कड़ी कार्रवाई न की जाए| इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफ़ोन आइडिया को किसी किस्म की राहत देने से इनकार कर दिया था|

वोडाफ़ोन आइडिया सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफ़ोन आइडिया की वो याचिका ख़ारिज कर दी है जिसमें 2500 करोड़ रुपये 1000 करोड़ रुपये देने की पेशकश की गई थी|

कंपनी ने अपनी याचिका में ये मांग भी की थी कि उसके ख़िलाफ़ कोई कड़ी कार्रवाई न की जाए| इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफ़ोन आइडिया को किसी किस्म की राहत देने से इनकार कर दिया था| ये रक़म भले ही सरकारी राजस्व में अतिरिक्त कमाई के तौर पर दर्ज होगी पर ये माना जा रहा है कि पूरे टेलीकॉम उद्योग को इससे बड़ा झटका लगने वाला है
भारत भले ही दुनिया के सबसे बड़े टेलीकॉम बाजारों में शुमार होता है लेकिन इसके प्रमुख खिलाड़ी हाल के समय में बुरे दौर से गुजर रहे हैं|

टेलिकॉम कंपनियों को 13 अरब डॉलर की रकम सरकार को चुकानी है और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने 17 मार्च तक की मियाद तय की है| कोर्ट ने कंपनियों से ये भी पूछा है कि वक़्त पर पैसा न चुकाने के लिए टेलिकॉम कंपनियों पर क्यों न अवमानना की कार्रवाई की जाए? देश की सबसे बड़ी अदालत के फ़ैसले ने उनकी चिंताएं और बढ़ा दी हैं| देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में से एक वोडाफ़ोन आइडिया के लिए ये फ़ैसला उनके मुश्किल वक़्त में आया है|

 पिछले हफ़्ते ही कंपनी ने 6453 करोड़ रुपये के तिमाही घाटा दर्ज किया था, पिछले साल ये घाटा 4998 करोड़ रुपये का था|

हालात की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कंपनी के चेयरमैन कुमार मंगलम बिरला ने आधिकारिक रूप से ये कहा कि अगर सरकार या कोर्ट से मदद नहीं मिली तो कंपनी को अपना कारोबार बंद करना होगा| वोडाफ़ोन आइडिया और उसकी प्रतिस्पर्धी कंपनी एयरटेल ये पैसा चुकाने के लिए ऐसे वक़्त में और मोहलत मांग रहे हैं जब वे गिरे हुए कॉल और डेटा रेट और बढ़ते कर्ज़ के भार से दबे हुए हैं|17 मार्च की मियाद और सरकार की तरफ़ किसी पहल के न होने की सूरत में ये सवाल उठने लगा है कि क्या ये वोडाफ़ोन के भारत में कारोबार ख़त्म होने की शुरुआत है?

ब्रितानी कंपनी वोडाफ़ोन भारत के टेलीकॉम बाज़ार की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी कंपनियों में से एक है. अगर ब्रितानी कंपनी वोडाफ़ोन भारत में अपना कारोबार समेटती है तो इसका असर ग़ैरमामूली होगा. आख़िरकार कंपनी के पास 30 करोड़ से ज़्यादा उपभोक्ता हैं और वो हज़ारों लोगों को रोज़गार देती है| साथ ही कंपनी पर ताला लगने का नकारात्मक असर पूरे टेलीकॉम बाज़ार पर होने की संभावना है|
अगर वोडाफोन आइडिया भारतीय बाज़ार में कोराबार समेटने का फ़ैसला करते हैं तो इसका नतीजा ये होगा कि टेलीकॉम सेक्टर में केवल दो ही कंपनियां रह जाएंगी और वो होंगी रिलायंस जियो और एयरटेल|

भारती एयरटेल की स्थिति भी कोई बहुत अच्छी नहीं है. पिछली तिमाही में कंपनी ने 3 अरब डॉलर का घाटा दर्ज़ किया था और उसे सरकार को तकरीबन 5 अरब डॉलर की रकम चुकानी है|

टेलीकॉम बाज़ार की सबसे नई खिलाड़ी रिलायंस जियो के लिए ये फीलगुड वाली स्थिति है. बहुत से लोग टेलीकॉम बाज़ार की इस बदली हुई स्थिति के लिए रिलायंस जियो को ही जिम्मेदार मानते हैं|

तीन साल पहले जियो ने टेलीकॉम बाज़ार में कदम रखते ही मोबाइल इंटरनेट की दरें इस कदर कम कर दी थीं कि कॉल मार्केट डेटा मार्केट में बदल गया| इसके साथ ही भारत दुनिया में सबसे सस्ती दरों पर मोबाइल इंटरनेट सर्विस देने वाला देश बन गया| लेकिन वोडाफोन आइडिया और एयरटेल का बिज़नेस मॉडल बिखर कर रह गया|