विज्ञान, भारतीय सनातन धर्म, ज्योतिषशास्त्र और योग के अनुसार ध्वनि की विशेषताएं

पीएम मोदी के आग्रह की और उनकी इस ताली-थाली बजने की अपील की सोशल मीडिया पर कुछ लोग आलोचना कर रहे है तो  वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने इस पहल की जमकर तारीफ की है । आपको बता दे की  विशेषज्ञों की नजर में इस पहल के वैज्ञानिक कारण भी हैं, जिनका जिक्र आयुर्वेद में भी मिलता है।  इस बारे में विस्तार से आपको z न्यूज़ डिजिटल बता रहा है ।

विज्ञान, भारतीय सनातन धर्म, ज्योतिषशास्त्र और योग  के अनुसार ध्वनि की विशेषताएं
विज्ञान, भारतीय सनातन धर्म, ज्योतिषशास्त्र और योग के अनुसार ध्वनि की विशेषताएं

विज्ञान, भारतीय सनातन धर्म, ज्योतिषशास्त्र और योग  के अनुसार ध्वनि की विशेषताएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरूवार को देशवासियों को संबोधन के दौरान लोगों से कोरोना के बचाव और जागरूकता फैलाने में सहयोग मांगा। उन्होंने रविवार को जनता कर्फ्यू का पालन करने का अनुरोध किया। जनता कर्फ्यू के दौरान 22 मार्च को सुबह 7 बजे से लेकर रात 9 बजे तक लोगों को घर से बाहर न निकलने की अपील की  है। जनता कर्फ्यू के दौरान पीएम  ने सभी देशवासियों से  आग्रह किया है कि लोग रविवार को शाम पांच बजे 5  मिनट के लिए अपने घर की बालकनी ,खिड़की या दरवाजों पर खड़े होकर कोरोना संक्रमण के माहौल में भी अपने जान की चिंता न करते हुए देश के लिए काम कर रहे डॉक्टरों, पुलिस वालों, मीडिया कर्मियों, सफाई कर्मियों, होम डिलीवरी करने वालों और अन्य जरूरी सेवाएं देने वालों का पांच मिनट तक आभार व्यक्त करें। देश में लोग आभार व्यक्त करने के लिए ताली बजाने या थाली बजाने या फिर घंटी-शंख आदि बजा सकते हैं। देश में लगातार कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। सरकार हर स्तर पर मजबूती के साथ इस पर नियंत्रण का प्रयास कर रही है,जरूरी कदम उठा ही रही है देश के लोगों से भी कोरोना वायरस से लड़ाई में शुरुआत से ही सावधानियां बरतने और सहयोग की अपील की है।

पीएम मोदी के आग्रह की और उनकी इस ताली-थाली बजने की अपील की सोशल मीडिया पर कुछ लोग आलोचना कर रहे है तो  वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने इस पहल की जमकर तारीफ की है । आपको बता दे की  विशेषज्ञों की नजर में इस पहल के वैज्ञानिक कारण भी हैं, जिनका जिक्र आयुर्वेद में भी मिलता है।  इस बारे में विस्तार से आपको z न्यूज़ डिजिटल बता रहा है ।

विज्ञान अनुसार ध्वनि की विशेषताएं

विज्ञान में ध्वनि को लेकर काफी शोध हो चुके हैं और अब भी जारी हैं।  ध्वनि पैदा करने से खगोलीय ऊर्जा का उत्सर्जन होता है। यह अशुद्धियों को खत्म कर मानव में ऊर्जा का संचार करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि शंख की आवाज से वातावरण में मौजूद कई तरह के कीटाणुओं का नाश होता है। शंख बजाने से आतंरिक और बाहरी दोनों वातावरण प्रभावित होते हैं। कई सारी स्टडी में यह बात सामने आई है।


भारतीय सनातन धर्म और ज्योतिषशास्त्र के अनुसार

भारतीय सनातन धर्म और ज्योतिषशास्त्र के जानकार बताते  है कि पूजा के दौरान शंख बजाए जाने से वातावरण में ध्वनि पैदा करने से व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक शक्ति में स्फूर्ति आती है और आसपास का वातावरण भी अच्छा हो जाता है। शंख बजा कर, थाली बजाकर या घंटी बजा कर सकारात्मक ऊर्जा वाली ध्वनि उत्पन्न की जा सकती है। वहीं आयुर्वेद में घंटियों की ध्वनि का संबंध मानव मस्तिष्क से बताया गया है। घंटियां इस तरह से बनाई जाती हैं कि बजाने पर इसकी ध्वनि मनुष्य के दिमाग के दाएं और बाएं हिस्से में एकाग्रता पैदा करती हैं और मानव शरीर के उपचार केंद्रों को सक्रिय कर देती है।
 घंटियां बजाने से वातावरण में उत्पन्न कंपन काफी दूर तक जाता है। इस कंपन से इसके क्षेत्र में आने वाले जीवाणु, विषाणु और वातावरण में जो अशुद्धियां होती है,  वह ख़त्म  हो जाती है। घंटी की ही तरह शंख, थाली-चम्मच आदि की आवाज़  भी  निश्चित वर्ग  में तेज कंपन पैदा करती हैं।


योग में ताली बजाने के फायदे

योग में ताली बजाने के बहुत सारे फायदे बताए गए हैं। ताली बजाने से हमारे हाथों में एक्यूप्रेशर पॉइंट्स पर अच्छा दबाव पड़ता है। इससे हमारे हृदय और फेफड़ों की समस्याओं में फायदा पहुंचता है। फिजियोथेरेपिस्ट बताते हैं कि हमारे शरीर के 30 से ज्यादा एक्यूप्रेशर पॉइंटस हमारी हथेलियों में होते हैं। प्रेशर पॉइंट पर दबाव बनने से उससे जुड़े अंगों तक ब्लड और ऑक्सीजन का सर्कुलेशन अच्छे से होने लगता है।