प्रधानमंत्री के स्मार्ट सिटी में रोड़ा बने काशी के जर्जर भवन

वाराणसी अपने कला और संस्कृति के वजह से पुरे विश्व में जाना जाता है और अब प्रधानमंत्री संसदीय क्षेत्र होने की वजह से बनारस और भी प्रसिद्ध हो गया है बतादे लगातार काशी के विकास के लिए कई योजनाए लाए जा रहे है साथ ही करोडो करोडो रूपए इन योजनाओ को साकार करने के लिए दिए जा रहे है | लेकिन आलम ये है की वाराणसी में जर्जर भवनों के कारण काशी का विकास कही ना कही रुक जा रहे |

प्रधानमंत्री के स्मार्ट सिटी में रोड़ा बने काशी के जर्जर भवन

 

वाराणसी अपने कला और संस्कृति के वजह से पुरे विश्व में जाना जाता है और अब प्रधानमंत्री संसदीय क्षेत्र होने की वजह से बनारस और भी प्रसिद्ध हो गया है बतादे लगातार काशी के विकास के लिए कई योजनाए लाए जा रहे है साथ ही करोडो करोडो रूपए इन योजनाओ को साकार करने के लिए दिए जा रहे है | लेकिन आलम ये है की वाराणसी में जर्जर भवनों के कारण काशी का विकास कही ना कही रुक जा रहे |  वाराणसी में जर्जर मकान लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बनने लगे हैं। पुराने शहर की गलियों में कई ऐसे भी जर्जर मकान हैं जो हल्का सा भी झटका सहन नहीं कर पाएंगे ।



 कई बार तो बड़े हादसे भी हो चुके है  ताजा मामला दशाश्वमेध वार्ड स्थित त्रिपुरा भैरवी मोहल्ले के रानी भवानी गली में गिरे तीन मंजिल भवन का सामने आया है बतादे ये निर्माण सदियों पहले की है | इस घटना से पुरे प्रशासन में हड़कंप मच गया है इस दौरान मौका मुआयना के लिए क्षेत्र के विधायक व राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डाॅ. नीलकंठ तिवारी क्षेत्रीय पार्षद नरसिंह दास के साथ मौके पर पहुंचे। बाद में मौका मुआयना के लिए नगर आयुक्त भी मौके पर पहुंचे और स्थानीय जनता ने स्मार्ट सिटी के काम पर आपत्ति जताई और गलियों में होने वाले काम के लिए मिनी जेसीबी के प्रयोग पर आक्रोश जताया।लोगो का कहना है की सकरी गलियों में जेसीबी  से कार्य कराना काफी खतरनाक है |

आप को बतादे पुरानी काशी में आज भी कई मकान तो दूसरे भवनों के सहारे खड़े हैं,  और लगता है पास के मकानों का सपोर्ट हटने पर जर्जर मकान भरभरा कर जमीन पर गिर पड़ेंगे। फिर भी ऐसे मकानों में लोग रह रहे हैं। इंजीनियरों द्वारा इन भवनों को जर्जर घोषित करने पर भी नगर निगम व जिला प्रशासन ने इन्हें गिराने की कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसे में स्मार्ट सिटी की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ दिनों पहले नगर निगम के द्वारा 100 से 150 वर्ष पुराने भवनों को जर्जर घोषित करने के साथ नोटिस भेज चुका है|

 नगर निगम की सूची के अनुसार दो साल पहले जर्जर भवनों की संख्या 341 हो गई थी लेकिन बीते वर्ष बारिश में कई भवनों की दीवारें गिर गईं और कुछ लोग जख्मी हो गए तो 49 भवनों को ध्वस्त किया गया। अब भी जर्जर भवनों की संख्या 292 है। इसमें 193 ऐसे भवन हैं जिनका ध्वस्तीकरण बेहद जरूरी है।
इस घटना के बाद जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने एसीएम द्वितीय को जिम्मेदारी दी है जो नगर निगम की सूची के अनुसार जर्जर भवनों को गिरवाने का कार्य करेंगे।