आज है 'Nightingale of India' सरोजिनी नायडू का जन्मदिन,जानिए उनके जीवन के कुछ अनसुने पहलू

सरोजिनी नायडू को 'Nightingale of India'भी कहा जाता है। वह एक स्वतंत्रता सेनानी थीं, इसके अलावा वह बहुत अच्छी लेखिका और गायिका थीं। सरोजिनी नायडू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनने वाली पहली भारतीय महिला थीं और उत्तर प्रदेश राज्य की राज्यपाल बनने वाली पहली महिला थीं। वह एक महान देशभक्त, राजनेता, संचालक और प्रशासक थी।

आज है 'Nightingale of India' सरोजिनी नायडू का जन्मदिन,जानिए उनके जीवन के कुछ अनसुने पहलू

भारत में हर साल 13 फरवरी को राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और कवयित्री सरोजिनी नायडू के सम्मान में 13 फरवरी को उनको जयंती पर भारत में राष्ट्रीय महिला दिवस हर साल मनाया जाता है। 'नाइटिंगेल ऑफ इंडिया' और 'भारत कोकिला' के नाम से मशहूर सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हुआ था। सरोजिनी नायडू की 135वीं जयंती के अवसर पर 13 फरवरी 2014 से देश में राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत की गई है। आज सरोजिनी नायडू की 142वीं जयंती है। सरोजिनी नायडू ने देश की स्वतंत्रता के लिए भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी।सरोजिनी नायडू को ” Nightingale of India “ भी कहा जाता है। वह एक स्वतंत्रता सेनानी थीं, इसके अलावा वह बहुत अच्छी लेखिका और गायिका थीं। Sarojini Naidu भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनने वाली पहली भारतीय महिला थीं और उत्तर प्रदेश राज्य की राज्यपाल बनने वाली पहली महिला थीं। वह एक महान देशभक्त, राजनेता, संचालक और प्रशासक थी।

जानिए सरोजिनी नायडू की जीवनी 

सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी, 1879 को हैदराबाद में हुआ था। इनके पिता का नाम अघोरनाथ चट्टोपाध्याय था, जो कि नामी विद्वान थे। इनकी मां भी एक कवयित्री थीं और बांग्ला में लिखती थीं। बचपन से ही सरोजिनी नायडू काफी तेज थीं, जिसकी वजह से उन्होंने सिर्फ 12 साल की उम्र में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास कर ली थी और 14 वर्ष की उम्र में सभी अंग्रेजी कवियों की रचनाओं का अध्ययन कर लिया था। -1895 में हैदराबाद के निजाम ने सरोजिनी नायडू वजीफे पर इंग्लैंड भेजा था। सरोजिनी नायडू को पहले लंदन के किंग्स कॉलेज और बाद में कैम्ब्रिज के गिरटन कॉलेज में पढ़ने का मौका मिला। पढ़ाई के साथ-साथ सरोजिनी कविताएं भी लिखती थीं। गोल्डन थ्रैशोल्ड उनका पहला कविता संग्रह था। 1898 में सरोजनी का विवाह डॉ. गोविन्द राजालु नायडू से हुआ था। - सरोजिनी नायडू ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई थी। सरोजिनी नायडू साल 1914 में पहली बार महात्मा गांधी से मिलीं और देश के लिए खुद को समर्पित करने की बात उनसे की। - सरोजिनी नायडू साल 1925 में कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष बनीं। सरोजिनी नायडू को 1928 में ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत में प्लेग महामारी के दौरान अपने कार्यों के लिए कैसर-ए-हिंद से सम्मानित किया गया था।सरोजिनी नायडू 1932 में भारत के प्रतिनिधि के रूप में दक्षिण अफ्रीका गई थीं। -सरोजिनी नायडू 1947 में संयुक्त प्रांत (अब उत्तर प्रदेश के रूप में जाना जाता है) की पहली महिला राज्यपाल बनी थीं। 2 मार्च, 1949 को लखनऊ में अपने कार्यालय में कार्य करने के दौरान दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था। -सरोजिनी नायडू अपने साहित्यिक योगदान के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। उनकी कुछ कविताओं को स्कूल के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया गया है। उनकी साहित्यिक कृतियों में गोल्डन थ्रेशोल्ड (1905), द बर्ड ऑफ टाइम: सॉन्ग ऑफ लाइफ, डेथ, एंड द स्प्रिंग, द ब्रोकन विंग: सॉन्ग्स ऑफ लव, डेथ एंड द स्प्रिंग, द गिफ्ट ऑफ इंडिया, मुहम्मद जिन्ना: एंबेसडर ऑफ यूनिटी , द सेप्ट्रेड फ्लूट: सांग्स ऑफ इंडिया, किताबीस्तान, द इंडियन वीवर्स शामिल हैं।


कुछ पंक्तियाँ सरोजिनी नायडू की कविता के 

क्या यह जरूरी है कि मेरे हाथों में अनाज या सोने या परिधानों के महंगे उपहार हों? ओ !
 मैंने पूर्व और पश्चिम की दिशाएं छानी हैं मेरे शरीर पर अमूल्य आभूषण रहे हैं और इनसे मेरे टूटे गर्भ से अनेक बच्चों ने जन्म लिया है 
कर्तव्य के मार्ग पर और सर्वनाश की छाया में ये कब्रों में लगे मोतियों जैसे जमा हो गए।
 वे पर्शियन तरंगों पर सोए हुए मौन हैं, वे मिश्र की रेत पर फैले शंखों जैसे हैं, वे पीले धनुष और बहादुर टूटे हाथों के साथ हैं
 वे अचानक पैदा हो गए फूलों जैसे खिले हैं वे फ्रांस के रक्त रंजित दलदलों में फंसे हैं 
क्या मेरे आंसुओं के दर्द को तुम माप सकते हो या मेरी घड़ी की दिशा को समझ करते हो
 या मेरे हृदय की टूटन में शामिल गर्व को देख सकते हो और उस आशा को, जो प्रार्थना की वेदना में शामिल है? 
और मुझे दिखाई देने वाले दूरदराज के उदास भव्य दृश्य को जो विजय के क्षति ग्रस्त लाल पर्दों पर लिखे हैं? 
जब घृणा का आतंक और नाद समाप्त होगा और जीवन शांति की धुरी पर एक नए रूप में चल पड़ेगा, 
और तुम्हारा प्यार यादगार भरे धन्यवाद देगा, उन कॉमरेड को जो बहादुरी से संघर्ष करते रहे, मेरे शहीद बेटों के खून को याद रखना!