Varanasi : सिंगम बनने के कोशिश में मास्क पहनना भूल गए वाराणसी के दरोगा गौरव उपाध्याय

उत्तर प्रदेश में कोरोना के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं , जहां उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिछले 4 दिनों में 20,000 से अधिक केस कोरोना के सामने आए हैं। वही अलग-अलग शहरों में भी केस आने तेज हो चुके हैं , इसी बीच जिलाधिकारी अपने तरीके से आम जनमानस को सुरक्षित रखने के लिए समय और सीमाओं पर पाबंदी लगा रहे हैं।

Varanasi : सिंगम बनने के कोशिश में मास्क पहनना भूल गए वाराणसी के दरोगा गौरव उपाध्याय

उत्तर प्रदेश में कोरोना  के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं , जहां उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिछले 4 दिनों में 20,000 से अधिक केस कोरोना के सामने आए हैं। वही अलग-अलग शहरों में भी केस आने तेज हो चुके हैं , इसी बीच जिलाधिकारी अपने तरीके से आम जनमानस को सुरक्षित रखने के लिए समय और सीमाओं पर पाबंदी लगा रहे हैं।

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने यहां पर रात 9:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक कर्फ्यू लगा रखा है। जिस कारण यहां पर 9:00 बजे के बाद कोई भी व्यक्ति रोड पर नहीं दिखाई देता है और रात 9:00 बजे के बाद शहर की सारी दुकानें बंद कर दी जाती है।

इसी बीच कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब घाटों पर भी आम नागरिकों के लिए पाबंदी लगा दी गई है। शाम 4:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए घाटों पर लोगों की पाबंदी लगा दी गई है और सैलानीयों को मना कर दिया गया है कि शाम 4:00 बजे के बाद आप घाट के किनारे न घूमे।

इसी बीच कुछ तस्वीरें सामने आ रही है जिसमें अशी पुलिस चौकी पर तैनात दरोगा गौरव उपाध्याय बगैर मास के सार्वजनिक स्थल में घूम रहे हैं इसके साथ ही दूसरी और लाठी मारकर डीएम द्वारा जारी निर्देश का पालन कराने की कोशिश कर रहे हैं। बगैर मास की और डंडा मारने की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पुलिस कमिश्नर ने ट्वीट कर स्पष्ट किया कि भेलूपुर इंस्पेक्टर ने सार्वजनिक स्थान पर मास्क न लगाने के आरोप में जुर्माना वसूल लिया है।

वही दूर होगा गौरव उपाध्याय की कई ऐसी तस्वीर सामने आई है जो वाकई एक बार फिर से बनारस की पुलिस पर सवालिया निशान खड़े कर रही है , रीवा घाट के समीप जो व्यक्ति टहलते दिखे उनको समझा कर घर भेजने की वजह दरोगा गौरव उपाध्याय ने लाठी से पीटकर खदेड़ ने लगे , एक और खास बात यह भी कि दरोगा को विभागीय नियमानुसार अपनी पिस्टल हॉस्टल लेदर केस में रखनी चाहिए थी लेकिन बॉलीवुड की फिल्मों की तरह सिंगम बनने के चक्कर में वह सरकारी नियम भी भूल गए।

इस बात पर गौरव का कहना था कि वह जिन लोगो को मार रहे थे वह घाट की सीढ़ियों पर बैठकर नशा कर रहे थे , उनके समीप ही चिलम पड़ी हुई थी जिसकी वजह से उन्हें लाठी दिखाकर डांटते हुए भगा रहे थे ।

अब यह सवाल चौकी पर उठना चाहिए कि वाकई जब लोग चिलम पी रहे थे तो वहां पर पहले से पुलिस को जानकारी क्यों नहीं थी। आज जा कर यह जानकारी पुलिस के पास कैसे पहुंची। अब सवाल बनारस पुलिस पर फिर से एक बार फिर से खड़े हो रहे हैं कि वाकई चौकी और थानों के साथ घाट में कई अवैध काम आज भी बनारस में खुलेआम हो रहे हैं।