Tandav Web Series | SC का तांडव के निर्माताओं को गिरफ्तारी में राहत देने से इनकार , तांडव को लेकर देश भर में हो रहा है तांडव

वेब सीरीज ‘तांडव’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कई राज्यों में विरोध और मुकदमों के बाद तांडव की टीम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। वेब सीरीज की टीम ने उनके खिलाफ हुई एफआईआर को रद्द करने का आग्रह सुप्रीम कोर्ट से किया था। लेकिन आज भी उन्हें कोर्ट से राहत नहीं मिली। कोर्ट ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने के मामले में दर्ज एफआईआर में गिरफ्तारी पर रोक लगाने से मना कर दिया। हालांकि कोर्ट ने देशभर में दर्ज एफआईआर को एक साथ जोड़ने की मांग पर नोटिस जारी किया है।

Tandav Web Series | SC का तांडव के निर्माताओं को गिरफ्तारी में राहत देने से इनकार , तांडव को लेकर देश भर में हो रहा है तांडव

वेब सीरीज ‘तांडव’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कई राज्यों में विरोध और मुकदमों के बाद तांडव की टीम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। वेब सीरीज की टीम ने उनके खिलाफ हुई एफआईआर को रद्द करने का आग्रह सुप्रीम कोर्ट से किया था। लेकिन आज भी उन्हें कोर्ट से राहत नहीं मिली। कोर्ट ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने के मामले में दर्ज एफआईआर में गिरफ्तारी पर रोक लगाने से मना कर दिया। हालांकि कोर्ट ने देशभर में दर्ज एफआईआर को एक साथ जोड़ने की मांग पर नोटिस जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट में अभिनेता मोहम्मद जीशान अय्यूब, अमेजन प्राइम वीडियो (भारत) और तांडव के मेकर्स की याचिका पर सुनवाई हुई। उनकी तरफ से फली नरीमन, मुकुल रोहतगी और सिद्धार्थ लूथरा जैसे दिग्गज वकीलों ने जिरह की। इस दौरान सबसे पहले वरिष्ठ वकील फली नरीमन ने अदालत को बताया कि सीरीज में से कुछ आपत्तिजनक कंटेंट को हटा दिया गया था और इस संबंध में माफी भी मांगी गई थी।  उन्होंने कहा कि अब इस मामले में कुछ भी नहीं बचा है। नरीमन ने अदालत से कहा कि जिन कंटेंट से लोगों की तथाकथित धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची थी, उन्हें हटा दिया गया है।

इस पर जस्टिस अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एम आर शाह की बेंच ने कहा, “आप चाहते हैं कि एफआईआर को रद्द कर दिया जाए। लेकिन इसके लिए आप हाई कोर्ट में क्यों नहीं गए?” नरीमन ने जवाब दिया, “एफआईआर 6 राज्यों में है। हम अलग-अलग हाई कोर्ट में नहीं जा सकते।”

इस पर नरीमन ने ये भी कहा कि कोर्ट को ये तय करना होगा कि देश में अनुच्छेद 19(1)(A) यानी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार है या नहीं? इस पर जजों ने जवाब दिया, “देश में अनुच्छेद 21 के तहत सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार भी लोगों को मिला है। आप किसी को अपमानित नहीं कर सकते।”

वरिष्ठ वकील पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने भी अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट हमेशा से इसकी रक्षा के लिए आगे आता रहा है।” इस पर जजों ने कहा कि अभिव्यक्ति के अधिकार की भी सीमाएं हैं। उनका उल्लंघन कर मुकदमे से नहीं बचा जा सकता।

सीरीज में भगवान शिव का विवादित तरीके से चित्रण करने वाले अभिनेता जीशान अय्यूब के वकील ने दलील दी कि वह सिर्फ एक अभिनेता हैं। उनके साथ एक किरदार को निभाने के लिए कॉन्ट्रैक्ट किया गया था। बेंच के सदस्य जस्टिस एम आर शाह ने इस पर कहा, “आप अभिनेता हैं, इसका मतलब ये नहीं कि आप दूसरों की धार्मिक भावना को चोट पहुंचाने वाले किरदार निभा सकते हैं।”

इस तरह करीब 1 घंटे तक सभी वकील जजों को एफआईआर रद्द करने की मांग पर नोटिस जारी करने के लिए आश्वस्त करने की कोशिश करते रहे। वकीलों ने फिर यहां गिरफ्तारी पर रोक की कोशिश की। उन्होंने कहा, “कई राज्यों की पुलिस गिरफ्तारी की तैयारी कर रही है। कम से कम कोर्ट तब तक के लिए गिरफ्तारी पर रोक लगा दे, जब तक याचिकाकर्ता वहां की अदालतों में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी नहीं देते। लेकिन कोर्ट ने इससे भी मना कर दिया। बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता इस तरह की राहत के लिए संबंधित हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएं। जजों ने कहा कि वो सिर्फ अलग-अलग राज्यों में दर्ज एफआईआर को एक साथ जोड़ने की मांग पर सुनवाई कर सकते हैं। इसके लिए वो नोटिस जारी कर रहे हैं। अब इस मामले में आगे की सुनवाई 4 हफ्ते बाद की जाएगी।