वाराणसी में बड़ा 'संत समागम', अयोध्या के बाद 'काशी विश्वनाथ मुक्ति' पर बनेगी रणनीति

महादेव की नगरी काशी में 3 और 4 जनवरी को संत जुटने वाले हैं। संत समाज और विश्व हिंदू परिषद के प्रतिनिधि इस दौरान काशी विश्वनाथ की मुक्ति की रणनीति बनाएंगे। इसके साथ ही बैठक में आगामी कुंभ मेले और अयोध्या में निर्माणाधीन राम मन्दिर से आम जनमानस को जोड़ने पर विस्तार से चर्चा होगी।

वाराणसी में बड़ा 'संत समागम', अयोध्या के बाद 'काशी विश्वनाथ मुक्ति' पर बनेगी रणनीति

अयोध्या, काशी और मथुरा। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अजेंडे में ये लंबे समय से रहा है। 36 साल पहले दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई धर्म संसद में वीएचपी ने राम मंदिर के साथ काशी और मथुरा को मुक्त कराने का संकल्प लिया था। अयोध्या में राम मंदिर का रास्ता साफ हो चुका है। अब वाराणसी में काशी विश्वनाथ की मुक्ति के लिए संतों ने कमर कस ली है। नए साल की शुरुआत में काशी में देशभर के शीर्ष संत जुटने वाले हैं। संतों के साथ ही विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी भी इस बैठक में हिस्सा लेंगे। अखिल भारतीय संत समिति ने इसकी पूरी रणनीति तैयार कर ली है।

एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत में अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने बताया कि 3 और 4 जनवरी को वाराणसी में देशभर के शीर्ष संतों की बैठक होगी। शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में अखाड़ा परिषद के अलावा देश के प्रमुख पीठों के पीठाधीश्वर शामिल होंगे। योगगुरु बाबा रामदेव और आर्ट ऑफ लिविंग के प्रमुख श्री श्री रविशंकर को भी इसमें आमंत्रित किया जाएगा। इसके अलावा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव और वीएचपी उपाध्यक्ष चंपत राय के साथ ही आरएसएस के वरिष्ठ नेता कृष्ण गोपाल भी इस बैठक में शामिल होंगे।

काशी विश्वनाथ की मुक्ति के अलावा इस बैठक में आगामी कुंभ मेले की व्यवस्था और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से आम जनता को कैसे जोड़ा जाए इस पर भी विस्तार से चर्चा होगी। स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने बताया कि अयोध्या में निर्माणधीन राम मंदिर से जनता को जोड़ने के संबंध में भी इस बैठक में रणनीति बनाई जाएगी।

काशी विश्वनाथ की मुक्ति के अलावा इस बैठक में आगामी कुंभ मेले की व्यवस्था और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से आम जनता को कैसे जोड़ा जाए इस पर भी विस्तार से चर्चा होगी। स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने बताया कि अयोध्या में निर्माणधीन राम मंदिर से जनता को जोड़ने के संबंध में भी इस बैठक में रणनीति बनाई जाएगी।

 

चंपत राय ने ट्वीट में बताया है कि गांव-मोहल्लों में लाखों कार्यकर्ता जाएंगे और स्वेच्छा से जो भी लोग दान देना चाहेंगे, उस राशि को मंदिर निर्माण के लिए इकट्ठा किया जाएगा। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए 10, 100 और एक हजार रुपये के कूपन और रसीदें छापी गई हैं। जैसा दान मिलेगा उसी के मुताबिक कार्यकर्ता रसीद देंगे। करोड़ों घरों में प्रभु के मंदिर की तस्वीर पहुंचेगी। जनसंपर्क का यह काम मकर संक्रांति यानी 14 जनवरी से शुरू होकर माघ पूर्णिमा तक चलेगा।