चौका देने वाली खबर आई समाने, किसान आंदोलन के समर्थन ट्वीट करने के लिए रिहाना को मिले थे 18 करोड़ ?

किसान आंदोलन पर कुछ विदेशी हस्तियों ने अपना समर्थन दिखया था जिन में से पॉप सिंगर रिहाना शामिल है | उनके समर्थन ट्वीट के बाद से ही देश और बॉलीवुड में बवाल मचा हुआ है | लेकिन अगर ताजा खुलासे माने तो पॉप सिंगर रिहाना को किसान आंदोलन के समर्थन में पोस्ट करने के बदले 2.5 मिलियन डॉलर यानी करीब 18 करोड़ रुपए मिले थे। इस डील के पीछे कनाडा की पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन का हाथ है।

चौका देने वाली खबर आई समाने, किसान आंदोलन के समर्थन ट्वीट करने के लिए रिहाना को मिले थे 18 करोड़ ?

किसान आंदोलन पर कुछ  विदेशी हस्तियों ने अपना समर्थन दिखया था जिन में से पॉप सिंगर  रिहाना शामिल है | उनके समर्थन ट्वीट के बाद से ही देश और बॉलीवुड में बवाल मचा हुआ है | लेकिन अगर ताजा खुलासे माने तो पॉप सिंगर रिहाना को किसान आंदोलन के समर्थन में पोस्ट करने के बदले 2.5 मिलियन डॉलर यानी करीब 18 करोड़ रुपए मिले थे। इस डील के पीछे कनाडा की पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन का हाथ है।

द प्रिंट की खबर के मुताबिक पीआर फर्म स्काईरॉकेट ने इस काम को अंजाम दिया। जिसे एक खालिस्तानी एमओ धालीवाल डायरेक्ट करता है। उसी ने भारत में चल रहे किसान आंदोलन के सपोर्ट में ट्वीट करने के लिए रिहाना को पेमेंट किया था। इतना ही नहीं किसानों के समर्थन में इंटरनेशनल लेवल पर शुरू हुए इस अभियान को कनाडा के नेताओं और कार्यकर्ताओं का समर्थन भी मिला था।
कंगना पहले ही दिन से किसान आंदोलन के विरोध में हैं। जब रिहाना को ट्वीट के बदले पेमेंट करने की खबर सामने आई तो उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बार फिर अपनी बात रखी। कंगना ने लिखा-इतना कम, इतने की तो मैं अपने फ्रैंड्स को गिफ्ट दे देती हूं। कितने सस्ते हैं ये सब यार, हा हा हा हा। फोर्ब्स इनकम की सबसे बड़ी धोखाधड़ी। उनके पास हस्तियों के वित्तीय डेटा तक पहुंच नहीं है फिर भी सितारों की नकली आय का दावा करते हैं। अगर मैं झूठ बोल रही हूं तो फोर्ब्स मेरे खिलाफ मुकदमा करें।

रिहाना ने किसान आंदोलन पर अमेरिकी न्यूज चैनल CNN की खबर को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए सवाल उठाया था- ‘हम इस पर यानी भारत के किसान आंदोलन पर बात क्यों नहीं कर रहे हैं?’ उनकी इस पोस्ट को करीब 2.20 लाख लोगों ने री-ट्वीट किया है। गौरतलब है कि ट्विटर पर रिहाना के 11 करोड़ फॉलोअर्स हैं।

ग्रेटा थनबर्ग ने सोशल मीडिया पर टूलकिट नाम का एक डॉक्यूमेंट शेयर किया जिसे थोड़ी देर बाद उन्होंने डिलीट कर दिया था। इसमें पूरे एजेंडे की प्लानिंग की पावर पॉइंट स्लाइड भी थी। जिसमें पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन का लोगो भी लगा हुआ था। कनाडा के इस NGO की वेबसाइट आस्क इंडिया पर किसानों से जुड़े तमाम प्रोपेगेंडा भरे पड़े हैं। साथ ही उनकी सोशल मीडिया साइट्स पर देश-विरोधी, खालिस्तान समर्थक मैटेरियल भी है।टूलकिट के मुताबिक ये कैम्पेन नवंबर 2020 से चल रहा है। 23 और 26 जनवरी के दिन इनकी बड़े लेवल इस प्रोपेगेंडा फैलाने की योजना थी।