उत्तरप्रदेश पंचायत चुनाव - पंचायत चुनावों में आरक्षण लिस्ट आने में अभी और देरी फरवरी तक आएगी लिस्ट

उत्तरप्रदेश में जल्द ही पंचायत चुनाव होने वाले है जिसका सबको बेसबरी से इंतज़ार है साथ ही पंचायत चुनावों में आरक्षण एक बड़ा मुद्दा रहता है| इसीलिए चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही इस बात की खोज खबर ली जाने लगी है कि आरक्षण की लिस्ट कब आ रही है| चर्चा तो इतनी तेज है कि लोग लखनऊ के चक्कर लगाने लगे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि आरक्षण के बाद ही चुनाव लड़ने या लड़ाने का हिसाब-किताब तय होगा, लेकिन आपको बता दें कि आरक्षण लिस्ट जारी होने में अभी समय लगेगा. लिस्ट के जारी होते-होते आधी फरवरी बीत जायेगी|

उत्तरप्रदेश पंचायत चुनाव - पंचायत चुनावों में आरक्षण लिस्ट आने में अभी और देरी फरवरी तक आएगी लिस्ट

उत्तरप्रदेश में जल्द ही पंचायत चुनाव होने वाले है जिसका सबको बेसबरी से इंतज़ार है साथ ही पंचायत चुनावों में आरक्षण एक बड़ा मुद्दा रहता है|  इसीलिए चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही इस बात की खोज खबर ली जाने लगी है कि आरक्षण की लिस्ट कब आ रही है| चर्चा तो इतनी तेज है कि लोग लखनऊ के चक्कर लगाने लगे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि आरक्षण के बाद ही चुनाव लड़ने या लड़ाने का हिसाब-किताब तय होगा, लेकिन आपको बता दें कि आरक्षण लिस्ट जारी होने में अभी समय लगेगा. लिस्ट के जारी होते-होते आधी फरवरी बीत जायेगी| 

ऐसी उम्मीद है कि मार्च में पंचायत के चुनाव हो जायेंगे. वैसे हो तो इसे दिसम्बर में ही जाना चाहिए था, लेकिन कुछ तो कोरोना और कुछ नये क्षेत्रों के शामिल होने के चलते इसमें विलम्ब हुआ है| चुनावों को लेकर अभी तक की प्रगति ये है कि पंचायती राज निदेशालय परिसीमन में बिजी है|  पुनर्गठन का काम तो हो गया है, लेकिन परिसीमन अभी हो रहे हैं| इसके होते होते शायद जनवरी बीत जाये. राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज कुमार ने बताया कि उनकी तरफ से तैयारी पूरी है. वोटर लिस्ट का काम जारी है| जैसे ही शासन से उन्हें परिसीमन के बाद क्षेत्रों की लिस्ट मिल जायेगी वैसे ही वोटर लिस्ट का प्रकाशन कर दिया जायेगा| वैसे 22 जनवरी वोटर लिस्ट के प्रकाशन की डेट फिलहाल तय की गयी है| 

जहां तक आरक्षण की बात है, ये सबसे आखिरी प्रक्रिया है| क्षेत्रों की सीमा तय हो जाने के बाद ही आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की जायेगी|  ऐसा होते-होते आधी फरवरी निकल जायेगी| पंचायती राज निदेशालय में उप निदेशक स्तर के एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि 15 फरवरी तक शायद आरक्षण की लिस्ट तैयार कर ली जायेगी| इधर आरक्षण तय होगा और दूसरी तरफ वोटर लिस्ट तैयार मिलेगी| इन दोनों ही कामों के बाद चुनाव कराने के लिए ज्यादा वक्त नहीं लगेगा| 

बता दें कि वैसे तो हर चुनाव में आरक्षण नये सिरे से तय किये जाने चाहिए, लेकिन ऐसा हर बार हो नहीं पाता है| वर्षों से जो सीट रिजर्व है वो अभी भी रिजर्व चल रही है| सामान्य सीटों की भी यही स्थिति है. कुल सीटों में से महिलाओं के लिए इतनी सीटें आरक्षित होनी चाहिए जो एक तिहाई से कम न हों| इसी तरह अन्य पिछड़ा वर्ग की इतनी सीटें आरक्षित होना चाहिए जिससे वे 27 फीसदी से अधिक न हों|