गांवों में काम ना शहरों में रोजगार, परेशान मजदूर प्रधान मंत्री से लगा रहे है गुहार

वाराणसी के मिर्जामुराद में आज दिहाड़ी मजदूरों ने अपनी मजदूरी को लेकर प्रधानमंत्री से गुहार लगाई है इस दौरान मजदूरों का कहना है की उनकी मजदूरी अब भी बहुत कम है दरसअल आप को बतादे कुछ दिनों में प्रधानमंत्री का वाराणसी दौरा है और जिलाप्रशासन जोरो सोरो से तैयारी में लगा है और आज इसी क्रम में प्रधान मंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के मजदूरों ने प्रधानमंत्री जी वाराणसी आगमन पर पी एम से रोजगार और मजदूरी बढ़ाने की मांग की है।

गांवों में काम ना शहरों में रोजगार, परेशान मजदूर प्रधान मंत्री से लगा रहे है गुहार

वाराणसी के मिर्जामुराद में आज दिहाड़ी मजदूरों ने अपनी मजदूरी को लेकर प्रधानमंत्री  से गुहार लगाई है इस दौरान मजदूरों का कहना है की उनकी मजदूरी अब भी बहुत कम है दरसअल आप को बतादे कुछ दिनों में प्रधानमंत्री का वाराणसी दौरा है और जिलाप्रशासन जोरो सोरो से तैयारी में लगा है और आज इसी क्रम में प्रधान मंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के मजदूरों ने प्रधानमंत्री जी वाराणसी आगमन पर पी एम से रोजगार और मजदूरी बढ़ाने की मांग की है।

 

अपनी मांगोंं के समर्थन में बुधवार को आदर्श ग्राम नागेपुर में लोक समिति व दिहाड़ी मजदूर संगठन के बैनर तले मजदूरों ने सभा किया। उन्होंने प्रधानमंत्री जी से गाँव में रोजगार दिलाए जाने की मांग की। मजदूरों ने कहा कि कोरोना काल में तंगहाली में जी रहे मजदूरों की कमर टूट गयी है। गाँवों में लौटे लाखों प्रवासी मजदूर बेरोजगार घर बैठे है। महँगाई व बालू न मिलने से निर्माण के 90 फीसद कार्य बंद चल रहे हैं। जिससे उन्हें मजदूरी भी नहीं मिल रही है। दैनिक उपभोग की वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं।

 

 

 मजदूरी न मिलने से परिवार को एक वक्त का खाना भी नसीब नहीं हो रहा है। रोजाना हजारों मजदूर गांव से किराया भाड़ा लगाकर शहर के विभिन्न मजदूर मण्डियों में जाते हैं, दिनभर खड़े रहने के बाद शाम को बिना काम के ही वापस घर लौट जाते हैं। उन्होंने पी एम से मांग की है कि उन्हें गाँव में स्थाई रोजगार दिलाया जाए। सभी दिहाड़ी मजदूरों के राशन कार्ड बनाए जाएं। ताकि वह बच्चों का पेट भर सकें। मजदूरों ने मांग किया कि मनरेगा के लिए न्यूनतम दैनिक मजदूरी 600 रुपए तय हो। सालाना कार्य दिवस को 100 दिनों से बढ़ाकर 200 दिन किया जाए। इसके साथ ही 55 वर्ष से ऊपर के मजदूर को 3000 रुपये प्रतिमाह वृद्धावस्था पेंशन और महिला मजदूरों को मातृत्व अवकाश सुनिश्चित किया जाय। 

 

 

 

साथ ही मजदूरों ने मनरेगा को कृषि से जोड़ने, मजदूरों को निःशुल्क स्वास्थ्य बीमा और सभी देहाड़ी मजदूरों का श्रम विभाग में अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराने की माँग किया है।लोक समिति संयोजक नन्दलाल मास्टर ने कहा कि कोरोना ने दिहाड़ी मजदूरों को बेगारी का दंश सहने को मजबूर कर दिया है। मजदूर लगातार मजदूरी दर बढ़ाने की जायज मांग कर रहे है। गरीबी,भूख और पलायन को रोकने के लिये गाँव में ही रोजगार मुहैया कराना बेहतर विकल्प है। कार्यक्रम में मुख्यरूप से रामबचन,शिवकुमार,पंचमुखी,दिलीप,आत्मा,छोटेलाल,पिंटू राजभर,रजत, जगदीश, सूरज, अमित,श्यामसुन्दर, मनीष, आदि शामिल रहे। कार्यक्रम का नेतृत्व दिहाड़ी मजदूर संयोजक रामबचन ने किया।