यूपी की बेटी ने किया कमाल दर्ज कराया गिनीज बुक में रिकार्ड

वाराणसी में पढाई करने वाली नेहा ने अपना नाम गिनीज बुक ऑप वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करा कर वाराणसी और बलिया का नाम रौशन किया है | दरअसल बलिया की रहने वाली नेहा सिंह और वाराणसी के काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में पढाई करने वाली नेहा ने खनिज रंगों से भगवद्गीता पर आधारित ‘मोक्ष का पेड़’ नामक पेंटिंग बनाई है...

यूपी की बेटी ने किया कमाल दर्ज कराया गिनीज बुक में रिकार्ड

वाराणसी में पढाई करने वाली नेहा ने अपना नाम गिनीज बुक ऑप वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करा कर वाराणसी और बलिया का नाम रौशन किया है | दरअसल  बलिया की रहने वाली नेहा सिंह और वाराणसी के काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में पढाई करने वाली नेहा ने खनिज रंगों से भगवद्गीता पर आधारित ‘मोक्ष का पेड़’ नामक पेंटिंग बनाई है, सबसे बड़ी बात की ये पेन्टिन अब तक की सबसे बड़ी खनिजों रंगों से बनाई गई पेंटिंग है। उनकी इस मुकाम से जिले के लोग काफी खुश हैं। यह रिकॉर्ड इससे पहले आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा की श्रेया तातिनेनी के नाम था।
बलिया जिले रसड़ा के ग्राम डेहरी की नेहा सिंह बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र में अध्ययन कर रही हैं। गिनीज बुक में रिकार्ड दर्ज कराने के लिए नेहा सिंह  2019 से तैयारी कर रही थी। लॉकडाउन में घर आने के बाद नेहा ने अप्रैल से घर पर खनिज रंगों से पेंटिंग बनानी शुरू की। और इस पेंटिंग का आकार  62.72 स्क्वॉयर मीटर है।
पेंटिंग में भगवद्गीता के पेड़ की 18 शाखाओं और 18 अध्यायों को में दर्शाया गया है। सबसे ऊपर कमल एवं ॐ से मोक्ष प्राप्ति का चित्रण किया गया है | वहीं एक-एक शाखाओं में 1 से 18 पत्तों का चित्रण, पेंटिंग जुलाई में गिनीज के नियमों के अनुसार तैयार हो गई। इसके बाद नेहा ने सभी कागजात ऑनलाइन जमा कर दिए थे। हालांकि कोविड-19 के चलते गिनीज से जवाब आने में चार महीने का समय लग गया था। नेहा ने आज से पहले भी कई रिकार्ड अपने नाम कराए है इनका पहला रिकॉर्ड 10 अगस्त 2017 में ‘16 लाख मोतियों से 10.11 फुट का भारत का नक्शा’ बनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ इंडिया में दर्ज कराकर बनाया है। इसके बाद नेहा ने  ‘449 फीट कपड़े पर 38417 डॉट कर उंगलियों के निशान से हनुमान चालीसा’ लिख कर 30 सितंबर 2018 में दूसरा रिकॉर्ड यूरेशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है और वही तीसरा रिकॉर्ड एक दिसंबर 2020 में दुनिया का पहला दशोपनिषद् एवं महावाक्य का डिजिटल प्रिंटेड एल्बम बनाकर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज कराया | सबसे बड़ी बात को नेहा को यह उपलब्धि हासिल करने के लिए पिछले सात सालों में तैयार अपनी कई पेंटिंग को मुंबई के एक चित्रकला के व्यापारी को बेचनी पड़ी । नेहा की बनाई पंचतत्व की पेंटिंग को प्रवासी भारतीय दिवस पर अमेरिका से आए एक अतिथि ने खरीदा था।