NBFC's ने बैंकों की तरह ही राहत मिलने की मांग की

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के चलते हुआ 21 दिन का लॉक डाउन जिसके वजह से देश के कई इंडस्ट्रीज काफी आहत हुए  है।जिसे देखते हुए आरबीआई ने बैंकों को मोरेटोरियम देने का महत्वपूर्ण फैसला किया।जिसके तहत टर्म लोन पर 3 महीने की ई.एम.आई पर राहत मिली है। लेकिन अब सवाल यह है कि उन कर्ज़ों का क्या जो विभिन्न उद्योगों से जुड़े लोगो ने और छोटे बड़े कारोबारियों ने बैंकों के बजाय नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी से लोन के रूप में लिए हैं। ऐसे में जिस तरह का मेरिटोरियम बैंकों को दिया गया है उसी तरह से एनबीएफसी को भी देने की मांग उठी है।

इस तर्ज में श्रेई इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड के CEO राकेश कुमार भूटोरिया ने कहा कि कोविड-19 और लॉक डाउन दोनों ही इकोनामी पर काफी बुरा असर देगी जिसका असर देश की तमाम इंडस्ट्री पर पड़ना तय है।उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में हो रहे गड्ढे को भरने के लिए भले ही सरकार द्वारा तमाम मेरिटोरियम और राहत पैकेज दिया जा रहा है लेकिन अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए इसे और बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि Corona पर नियंत्रण न होने के कारण लॉक डाउन की अवधि बढ़ाने पर सरकार विचार कर सकती है। जिसके चलते देश की अर्थव्यवस्था पर काफी गिरावट देखने को मिलेगा ।ऐसे में सरकार और आरबीआई को राहत पैकेज को बढ़ाने की आवश्यकता है।

साथ ही उन्होंने कहा कि आरबीआई द्वारा बैंकों की तरह ही NBFC's को भी मोरेटोरियम देना चाहिए।जिसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि ज्यादातर मीडियम और छोटे कारोबारीयों ने NBFC द्वारा ही लोन उठाया है और लॉक डाउन में कारोबार बंद होने के कारण कारोबारियों के लिए अब ईएमआई चुका पाना बहुत ही नामुमकिन है।ऐसे में एनबीएफसी के लिए मोरटोरियम का ऐलान कारोबारियों के लिए बड़ी राहत ला सकती है जिसकी उन्हें सख्त जरूरत है।

साथ ही उन्होंने बैंकों के 3 महीने के मोरटोरियम को 6 महीने में बदलने के साथ लोन रिस्ट्रक्चरिंग के परमिशन मिलने की भी मांग रखी।उन्होंने कहा कि लॉक डाउन के चलते  बंद बाजार की वजह से कारोबार काफी हद तक सिमट चुके हैं।ऐसे में बैंक बैक हिस्ट्री को देखते हुए लोन धारक के आवेदन पर उसके लोन की रिस्ट्रक्चरिंग करें और लोन की समय अवधि बढ़ाकर ईएमआई कम कर राहत दे। ऐसा करने पर बैंकों का NPA नहीं बढ़ेगा साथ ही इंडस्ट्री को दोबारा खड़े होने में मदद मिलेगी।