जाने महात्मा गांधी के हत्या के दोषी नाथूराम गोडसे की कहानी

नाथूराम देवदास गांधी से कहा मैं नाथूराम विनायक गोडसे हूं मैं भी वहीं था जहां गांधी जी जी था जहां गांधी जी जी की हत्या हुई आज तुमने अपने पिता को खोया है मेरा वजह से आप व आपके परिवार पर जो दुख पहुंचा है उसका मुझे बहुत बड़ा अफसोस है। मैंने यह काम किसी व्यक्तिगत रंजिश के चलते नहीं किया है। देवदास ने पूछा तब तुमने ऐसा क्यों किया ? गोडसे ने कहा केवल और केवल राजनीति वजह से नाथूराम ने देवदास से अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा लेकिन पुलिस ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया।

जाने महात्मा गांधी के हत्या के दोषी नाथूराम गोडसे की कहानी

जाने महात्मा गांधी के हत्या के दोषी नाथूराम गोडसे की कहानी

नाथूराम गोडसे का जन्म 19 मई 1910 को मध्यम वर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ था। 30 जनवरी 1948 इतिहास में काला दिन था जब नाथूराम ने गांधी जी को गोली मारकर हत्या कर दिया।

आखिर किस वजह से गोडसे ने गांधी की हत्या ?
नाथूराम,गांधी जी का विरोध करते थे। 30 जनवरी 1948 नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दिया गोली मारने के बाद गोडसे घटनास्थल से फरार नहीं हुये उसने आत्मसमर्पण कर दिया था।

गांधी जी के बेटे से नाथूराम की मुलाकात मार्ग थाना जेल में।
नाथूराम देवदास गांधी से कहा मैं नाथूराम विनायक गोडसे हूं मैं भी वहीं था जहां गांधी जी जी था जहां गांधी जी जी की हत्या हुई आज तुमने अपने पिता को खोया है मेरा वजह से आप व आपके परिवार पर जो दुख पहुंचा है उसका मुझे बहुत बड़ा अफसोस है। मैंने यह काम किसी व्यक्तिगत रंजिश के चलते नहीं किया है। देवदास ने पूछा तब तुमने ऐसा क्यों किया ? गोडसे ने कहा केवल और केवल राजनीति वजह से
नाथूराम ने देवदास से अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा लेकिन पुलिस ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया।

नाथूराम गोडसे का अंतिम बयान
कहां जाता है कि उसे सुनकर उपस्थित सभी लोगों की आंखें भर आई थी और कई लोगों  तो रोने लगे थे । एक जज महोदय ने अपनी टिप्पणी में लिखें थे कि यदि उस समय अदालत लोगों को जूरी मेमबर बना जाता और उनसे फैसला देने को कहा जाता तो निस्संदेह ओ  प्रचंड बहुमत से नाथूराम को निर्दोष होने का निर्देश देंते इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत से अपना घोषणापत्र खुद पढ़ कर जनता को सुनाने की अनुमति मांगी थी जज ने ने जज ने स्वीकार कर लिया।

गोडसे का आरोप गाधीं जी पर।
गोडसे अपने बयान में कहते है सम्मान,कर्तव्य और देशवासियों के प्रति प्यार कभी कभी कभी हमें अहिंसा के सिद्धांत से हटाने के लिए बाध्य कर देता है।
कभी यह नहीं मान सकता की किसी आक्रमक का सशस्त्र प्रतिरोध करना कभी गलत करना अन्यायपूर्ण हो सकता है प्रतिरोध करने और यदि संभव हो तो ऐसे शत्रु को बलपूर्वक बश में करना एक धार्मिक और नैतिक कर्तव्य मानता हूं। मुसलमान अपनी मनमानी कर रहे थे या तो कांग्रेसी उनकी इच्छा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उनकी सनक,मनमाने व आदि रवैये के स्वर में स्वर मिलाये अथवा उनके बिना काम चलाये वे अकेले ही प्रत्येक वस्तु व व्यक्ति के निर्णायक थे।
महात्मा गांधी अपने लिए (जूरी मेंबर जज  दोनो बने थे) गांधी जी ने मुसलमानों को खुश करने के लिए हिंदी भाषा के  सौंदर्य और सुंदरता के साथ बलात्कार किया गांधी के सारे प्रयोग केवल और केवल हिंदुत्व की कीमत पर किया जाता था। कांग्रेश अपनी देश भक्ति और समाजवाद का दम भरा करती थी उसी ने गुप्त रूप से बंदूक की नोक पर पाकिस्तान को स्वीकार कर लिया और जिन्ना के सामने निचता से आत्मसमर्पण कर दिया।मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के कारण भारत माता के टुकड़े कर दिए गए 15 अगस्त 1947 के बाद देश का एक तिहाई भाई हमारे लिए विदेशी भूमि बन गई (नेहरू तथा उनकी भीड़ की की स्वीकारोक्ति के साथ ही एक धर्म के आधार पर अलग देश बना दिया गया। इसी को वे बलिदान द्वारा जीती गई स्वतंत्रता कहते हैं बलिदान हुआ तो सिर्फ देश का हिंदुत्व का।

जब कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने गांधी जी जी के सहमति से इस देश को काट डाला जिसे हम पूजा की वस्तु मानते थे तो मेरा मस्तिक भयंकर क्रोध से भर गया मैंने साहस पूर्वक कहता हूं कि गांधी अपने कर्तव्य में असफल होंगे गांधी स्वयं को पाकिस्तान का पिता होना सिद्ध किया।
मैं गोडसे कहता हूं कि मैंने गोलियां एक ऐसे व्यक्ति पर चलाई गई थी जिनकी नीतियां और कार्यों से करोड़ों हिंदुओं को केवल बर्बादी और विनाश कर दिया ऐसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं थी जिसके द्वारा अपराधी को सजा दिलाई जा सके इसीलिए मैंने इस घातक रास्ते का अनुसरण किया।

नाथूराम गोडसे अपने लिए माफी नहीं मांगा
मैं अपने लिए माफी की गुजारिश नहीं करूंगा जो मैंने किया है उस पर मुझे गर्व है मुझे कोई संदेह नहीं कि कार्य का का वजन तोल कर भविष्य में किसी दिन इसका सही मूल्यांकन करेंगे। जब तक सिंधु नदी भारत के ध्वज के नीचे से ना बहे तब तक पतियों का विसर्जन मत करना नाथूराम ने न्यायालय में स्वीकार किया कि गांधीजी बहुत बड़े देशभक्त में स्वीकार किया कि गांधीजी बहुत बड़े देशभक्त स्वीकार किया कि गांधीजी बहुत बड़े देशभक्त थे उन्होंने निस्वार्थ भाव से देश सेवा कि मैं उनका बहुत आदर करता हूं। लेकिन किसी देश भक्त को को देश के टुकड़े करने के लिए एक संप्रदाय के साथ पक्षपात करने की अनुमति नहीं दे सकता हूं गांधी जी जी की हत्या के सिवा मेरे पास कोई दूसरा उपाय नहीं था।

अंबाला जेल में दी गई नाथूराम गोडसे को फांसी 15 नवंबर 1949 को सजा-ए-मौत
परिजनों को नहीं दिया गया गोडसे का शव अंबाला जेल के अंदर ही एक गाड़ी में डालकर उनके शव को पास की घाघरा नदी ले जाया गया वहीं सरकार ने गुपचुप तरीके से उनका अंतिम संस्कार कर दिया था।हिंदू महासभा के अत्री नाम के एक कार्यकर्ता शव के पीछे गये शअग्नि जब शांत हो गई तो उन्होंने एक डिब्बे में अस्थियां लाकर सुरक्षित रखा गोडसे के परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते उनकी अस्थियों को अभी तक चांदी के एक कलश में सुरक्षित रखा हुआ है।जानकारी के मुताबिक किसी व्यक्ति ने कहां गोडसे के परिजनों से की अस्थि को विसर्जन क्यों नहीं कर देते तो उनका जवाब था। इस का विसर्जन सिंधु नदी में ही होगा और जब अखंड भारत का सपना पूरा हो जाएगा।