मरकज और तबलीगी जमात जिसने बढ़ाई देश की चिंता |

 दरसल दक्षिणी दिल्ली के निजामुद्दीन (Nizamuddin) पश्चिम इलाके में 1 से 15 मार्च के बीच इस कार्यक्रम में 2000 से ज्यादा लोगों ने शिरकत की थी। इस कार्यक्रम में चीन, यमन, बांग्लादेश, श्रीलंका, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, अफगानिस्तान, इंग्लैंड के भी 100 से अधिक लोग मौजूद थे। इस बीच यहां से वापस गए  6 लोग तेलंगना में कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनकी देर शाम मौत हो गई। इसके साथ ही आप को बता दे की  इस मरकज में शामिल होने वाले 300 लोग कोरोना संदिग्ध पाए गए हैं।

 दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तब्लीगी जमात के एक कार्यक्रम के चलते देश में कोरोना वायरस के संक्रमण की विस्फोटक स्थिति पैदा हो गई है। देशभर में 224 नए मामले सामने आए हैं, जो एक दिन में नए मामलों का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसके साथ ही संक्रमितों की संख्या 15 सौ को पार कर गई है।
 दरसल दक्षिणी दिल्ली के निजामुद्दीन (Nizamuddin) पश्चिम इलाके में 1 से 15 मार्च के बीच इस कार्यक्रम में 2000 से ज्यादा लोगों ने शिरकत की थी। इस कार्यक्रम में चीन, यमन, बांग्लादेश, श्रीलंका, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, अफगानिस्तान, इंग्लैंड के भी 100 से अधिक लोग मौजूद थे। इस बीच यहां से वापस गए  6 लोग तेलंगना में कोरोना वायरस  से संक्रमित पाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनकी देर शाम मौत हो गई। इसके साथ ही आप को बता दे की  इस मरकज में शामिल होने वाले 300 लोग कोरोना संदिग्ध पाए गए हैं।  और अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में संक्रमितों के मामले हैं और इनमें से ज्यादातर वही हैं जो इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
लेकिन जिस कार्यकर्म की वजह से कोरोना का खतरा बढ़ गया उसके बारे में जान लेते है 
 आइये जानते है क्या है मरकज और तबलीगी जमात 
मरकज़ के मायने centre यानी केंद्र होता है और तबलीग का मतलब है अल्लाह और कुरान, हदीस की बात दूसरों तक पहुंचाना. वहीं जमात का मतलब ग्रुप से है. तबलीगी जमात यानी एक ग्रुप की जमात. तबलीगी मरकज का मतलब इस्लाम की बात दूसरे लोगों तक पहुंचाने का केंद्र.  दरअसल, तबलीगी जमात से जुड़े लोग पारंपरिक इस्लाम को मानते हैं और इसी का प्रचार-प्रसार करते हैं। एक दावे के मुताबिक इस जमात के दुनिया भर में  करीब 15 करोड़ सदस्य हैं।
बताया जाता है कि इस आंदोलन को 1927 में मुहम्मद इलियास अल-कांधलवी ने भारत में शुरू किया था। इसकी शुरुआत हरियाणा के नूंह जिले के गांव से शुरू हुई थी|  इस मरकस को बनाने का उनका मकसद था कि भारत के अनपढ़ मुसलमानों में बढ़ती जहालत को खत्म करके उनको इस्लाम के बताए गए रास्ते और नमाज की तरफ लाना था ताकि यह भटके हुए लोग नमाज पढ़ें, रोजे रखें और बुराइयों से बचें, सच्चाई अख्तियार करें. इन कामों से मरकज़  को इतनी प्रसिद्धि मिली कि वह पूरी दुनिया में जाना जाने लगा. दुनिया भर से लोग यहां आने लगे और फिर बुराई से अच्छाई की तरफ लाने का केंद्र बन गया. बता दे इन्हे पहली बड़ी मीटिंग करने में करीब 14 साल का समय लगा।उस वक्त  इस संगठन का कामकाज देश में पूरी तरह से जम चुका था और 1941 में 25,000 लोगों के साथ जमात की पहली मीटिंग आयोजित हुई। धीरे-धीरे यह आंदोलन पूरी दुनिया में फैल गया और दुनिया के अलग-अलग देशों में हर साल इसका सालाना कार्यक्रम होता है।ये जमात तीन दिन से लेकर चालीस दिन या और उससे अधिक दिनों के लिए होती है.