दीया कुम्हारों के जीवन को रोशन करने में नाकाम |

  क्यों दीये को ले कुम्हार की बात बस दिवाली पे होती है. दीये का कल अब अंत की कगार पे है। कुम्हार के हाथ की कला अब कौन समझे अब तो लोग बस लाइट की बात करते है.

  क्यों दीये को ले कुम्हार की बात बस दिवाली पे होती है. दीये का कल अब अंत की कगार पे है। कुम्हार के हाथ की कला अब कौन समझे अब तो लोग बस लाइट की बात करते है. पर लाइट की बात करते करते वो दौर भूल जाते है जब दिवाली का मतलब ही दीये वाली दिवाली हुआ करती थी। सरकार ने पॉलिथीन को बैन तो कर दिया है , पर आज भी दीये को अपनी पहचान बनाने में दिवाली का इंतजार करना पड़ता है।