Navratri 2021 - जानिए क्यों खास है इस बार की नवरात्रि और कब है कलश स्थापना का शुभ महूरत

हिंदू धर्म के सबसे पवित्र त्योहार नवरात्रि का आरंभ 7 अक्टूबर से हो रहा है. नवरात्रि में अलग-अलग तिथि में मां दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है. नवरात्रि पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में देखा जाता है.

Navratri 2021 - जानिए क्यों खास है इस बार की नवरात्रि और कब है कलश स्थापना का शुभ महूरत

हिंदू धर्म के सबसे पवित्र त्योहार नवरात्रि का आरंभ 7 अक्टूबर से हो रहा है. नवरात्रि में अलग-अलग तिथि में मां दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है. नवरात्रि पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में देखा जाता है. वाराणसी में माता दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों के मंदिर हैं. जहां इनकी पूजा के लिए भक्तों की भीड़ लगती है. माता भगवती के कलश स्थापना और पूजन महत्व को लेकर हमने काशी के धर्माचार्य और ज्योतिष पंडित पवन त्रिपाठी से बातचीत की.

 

 

काशी के धर्माचार्य पंडित पवन त्रिपाठी के मुताबिक नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करते समय शुभ मुहूर्त का खास ख्याल रखना चाहिए. 7 अक्टूबर को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 17 मिनट से सुबह 7 बजकर 7 मिनट तक है. इसी समय घटस्थापना करने से नवरात्रि फलदायी होगी. कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सबसे उत्तम माना गया है.कलश स्थापना के लिए कई सामग्री की जरूरत पड़ती है. इसमें 7 तरह के अनाज, चौड़े मुंह वाला मिट्टी का एक बर्तन, पवित्र स्थान से लाई गई मिट्टी, कलश, गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते, सुपारी, जटा वाला नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र और पुष्प की जरुरत होती है.

 

 

इस बार नवरात्र तिथि 9 दिन के बजाय कुल 8 दिन की पड़ रही हैं, जो शास्त्र के अनुसार सही नहीं माना जाता है. इस बारे में पंडित पवन त्रिपाठी ने बताया कि शास्त्र के अनुसार किसी भी चीज में वृद्धि और कमी दोनों ही उचित नहीं माना जाता है. अगर 8 दिन के बजाय यह 9 दिन का भी नवरात्र तिथि बढ़ता तो भी उचित नहीं माना जाता. इस बार 8 दिन का नवरात्र तिथि होने की वजह से दो तिथियों का समायोजन एक ही दिन होने पर ये सही संकेत नही माना जाएगा. इस माहौल में अराजकता, अपराध, हत्या, उत्पात की ज्यादा अधिकता देखने को मिलेगी. मगर हमें इन सारी बातों पर से ध्यान हटाकर सिर्फ अपने उद्देश्य यानी कि मां भगवती की पूजा-आराधना करनी चाहिए. हमें अपने घर, आस-पड़ोस की महिलाओं का मान-सम्मान करना चाहिए. उनमें भी दुर्गा का ही रूप है.