Kiran Bedi : भारत की पहली महिला आईपीएस को नहीं जमी सियासत, अब LG के पद से हटाई गई

देश की पहली महिला आईपीएस किरण बेदी को कौन नहीं जानता ,किरण बेदी का नाम देश की पहली महिला आईपीएस के साथ ही उनके नाम से कई ऐसे कारनामे जुड़े हैं जिससे किरण बेदी का नाम हमेशा याद रखा जाएगा।

Kiran Bedi : भारत की पहली महिला आईपीएस को नहीं जमी  सियासत, अब LG के पद से हटाई गई

देश की पहली महिला आईपीएस किरण बेदी को कौन नहीं जानता ,किरण बेदी का नाम देश की पहली महिला आईपीएस के साथ ही उनके नाम से कई ऐसे कारनामे जुड़े हैं जिससे किरण बेदी का नाम हमेशा याद रखा जाएगा।

किरण बेदी ने उस समय पुलिस की वर्दी पहनी थी , जब भारत में पुलिस की वर्दी सिर्फ मर्दों के लिए बनी थी , यह बात कहना गलत नहीं होगा कि 1972 के समय भारत में पुलिस की वर्दी मर्द पहना करते थे, और महिलाओं के लिए वर्दी पाना या फिर उसको पहनना बड़ा ही कठिन समय था। उस समय पुरुष प्रधान समाज का एक दबदबा हुआ करता था। उस समय तमाम आलोचनाओं और सवालों को दरकिनार करते हुए किरण बेदी 1972 में यूपीएससी की परीक्षा में सफल हुई, देश की पहली महिला आईपीएस बनी।

इसके साथ ही किरण बेदी को कई बार क्रेन बेदी भी कहा गया है, इसका कारण यह था कि किरण बेदी 1972 में यूपीएससी क्लियर करने के बाद एक समय दिल्ली की ट्रैफिक पुलिस में थी, उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की कार को उन्होंने क्रेन से उठवा लिया था ,तब से उनका नाम कई बार क्रेन बेदी  पढ़ा था।

किरण बेदी ने दिल्ली में रहते हुए कई बड़े पदों पर ड्यूटी की और 2007 में ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डिप्लोमेट के पद से इस्तीफा दे दिया। किरण बेदी को एशिया का नोबेल कहे जाने वाला रेमन मैग्सेसे अवार्ड भी मिल चुका है।

रिटायरमेंट के बाद किरण बेदी सामाजिक कार्यों में लग गई ,और 2011 में अन्ना आंदोलन में अरविंद केजरीवाल के साथ जुड़ी और देश को जनलोकपाल दिलाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक आंदोलन किया। यह सफर था अभी तक किरण बेदी का जहां पर उनकी सियासत में एंट्री नहीं हुई थी।

2014 में बीजेपी की सरकार बनी , और उन्होंने 2014 में पीएम पद के लिए नरेंद्र मोदी का समर्थन किया था। इसके बाद 2015 में जब दिल्ली में विधानसभा चुनाव हुआ तो भारतीय जनता पार्टी ने किरण बेदी को बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था। किरण बेदी को महेश 2270 ही वोट मिल पाए थे। और वह अरविंद केजरीवाल से हार गई, आम आदमी पार्टी की सरकार बनी। इसके बाद से लगा ऐसा कि किरण बेदी को राजनीति नहीं जमी उसके बाद उन्हें कई अलग-अलग पदों पर बीजेपी की ओर से दिया गया।  तत्काल में किरण बेदी एलजी के पद पर पांडिचेरी में थी जहां से उनको अब हटा दिया गया है।  करीब 100 दिन की इस कार्यकाल में किरण बेदी ने पांडिचेरी में काम किया है ,अब उनको हटाना कोई इत्तेफाक से कम नहीं है , क्योंकि अभी उनका कार्यकाल बचा था। अब देखने की बात है की जिनको हमने सुपरकॉप के नाम से जाना क्या उनको वाकई राजनीति नहीं भा रही है।