Boycott Chinese Products : जान लीजिए अनपढ़ टूरिस्ट गाइड ने खोजी थी कैसे गलवान घाटी : Ghulam Rassul

भारत और चीन के बीच विवाद की मुख्य वजह बनी पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी इस समय चर्चा में है। यहीं पर चीन और भारत के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। करीब 14000 फीट ऊंची इस घाटी का नाम लद्दाख के रहने वाले गुलाम रसूल गलवान के नाम पर है जहां तापमान शून्य से नीचे रहता है। पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में ही चीन और भारत के सैनिक आमने-सामने टिके हैं।

भारत और चीन के बीच विवाद की मुख्य वजह बनी पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी इस समय चर्चा में है। यहीं पर चीन और भारत के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। करीब 14000 फीट ऊंची इस घाटी का नाम लद्दाख के रहने वाले गुलाम रसूल गलवान के नाम पर है जहां तापमान शून्य से नीचे रहता है। पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में ही चीन और भारत के सैनिक आमने-सामने टिके हैं। घाटी की यह जगह अक्साई चिन इलाके में आती है, इसलिए चीन हमेशा यहां आंखें गड़ाये रहता है। सन 1962 से लेकर 1975 तक गलवान घाटी में ही भारत-चीन के बीच संघर्ष हुए। अब 45 साल बाद फिर गलवान घाटी सुर्खियों में है। लेह के चंस्पा योरतुंग सर्कुलर रोड पर आज भी गुलाम रसूल के पूर्वजों का घर है। उनके नाम पर यहां गलवान गेस्ट हॉउस भी है। अभी यहां उनकी चौथी पीढ़ी के कुछ सदस्य रहते हैं। उस समय लद्दाख के इलाके अंग्रेजों को ज्यादा पसंद नहीं आते थे। लद्दाख के रहने वाले गुलाम रसूल गलवान का जन्म साल 1878 में हुआ। 14 साल की उम्र में ही उसने घर छोड़ दिया और नई जगहों को खोजने के जुनून में वह अंग्रेजों का पसंदीदा गाइड बन गया।