HATHRAS मामले में कई गांव के स्वर्ण आरोपियों के पक्ष में एकजुट, पीड़ित परिवार पर लगाए कई संगीन आरोप

हाथरस गैंगरेप मामले में एक ओर जहां देशभर में आक्रोश भड़का है, लोग पीड़िता के लिए न्याय ki गुहार लगा रहे हैं। वहीं अब हमारे समाज का एक अलग ही चेहरा सामने आ रहा है। हाथरस में गांव का एक बढ़ा हिस्सा न्याय के लिए एकजुट हो चूका है। लेकिन यह न्याय की मांग, हैवानियत का शिकार हुई पीड़िता के लिए नहीं ,बल्कि ,इस घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों के हक़ में है।

हाथरस गैंगरेप मामले में एक ओर जहां देशभर में आक्रोश भड़का है, लोग पीड़िता के लिए न्याय ki गुहार लगा रहे हैं। वहीं अब हमारे समाज का एक अलग ही चेहरा सामने आ रहा है। हाथरस में गांव का एक बढ़ा हिस्सा न्याय के लिए एकजुट हो चूका है। लेकिन यह न्याय की मांग, हैवानियत का शिकार हुई पीड़िता के लिए नहीं ,बल्कि ,इस घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों के हक़ में है। जान कर आप हैरान होंगे की आज के वक़्त में जहाँ हम विकसित भारत और मॉडर्न ससोसाइटी की बात करते है ऐसे वक़्त में भी लोग इंसाफ का दमन जाती देखकर थामते हैं। शुक्रवार को बूलगढ़ी गांव के पास स्थित बघना गांव में ठाकुर समुदाय की पंचायत हुई जिसमें आरोपियों की रिहाई के लिए अभियान चलाने का फैसला लिया गया। इस पंचायत में बूलगढ़ी और आसपास के एक दर्जन गांव के ठाकुर और सवर्ण समाज के लोग पूरी तत्परता के साथ शामिल भी हुए। इस पर सवर्णों कहना है कि इस घटना की आड़ में सवर्णों को निशाना बनाया जा रहा है और सवर्ण समाज के खिलाफ दलितों का आक्रोश भड़काया जा रहा है। साथ ही उनका कहना है कि जब मेडिकल रिपोर्ट में गैंगरेप की पुष्टि ही नहीं हुई है तब आरोपियों को किस आधार पर निशाना बनाया गया है। इस घटना की CBI जांच की मांग करते हुए दोनों पक्षों के नार्कों टेस्ट कराए जाने की मांग भी की गयी है। साथ ही ये फैसला भी लिया गया कि पीड़िता के गांव में किसी बाहरी को घुसने नहीं दिया जाएगा। वहीं ठाकुर समाज से संबंध रखने वाले एक पूर्व विधायक ने पीड़ित परिवार पर आरोप लगाते हुए यह तक कह डाला कि लड़की की हत्या में उसके परिजन ही शामिल हैं। इस बिच बूलगढ़ी गांव के एक ठाकुर युवक ने छुपकर मीडिया से बात की और बताय कि पंचायत के बाद से ही माहौल बदल गया है और अब लोग, दलित परिवार के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। बता दें कि इस गांव में दलितों के घर गिने-चुने ही हैं। ठाकुरों और ब्राह्मणों के एक साथ आने के बाद पीड़ित परिवार के लिए हालात अब और भी मुश्किल हो जाएंगे। इस दौरान युवक ने बताया कि गांव के लोग अब पुलिस के साथ हैं और चाहते हैं कि मीडिया अब गांव में ना आए। ठाकुर समाज को लग रहा है कि मीडिया ने सिर्फ पीड़ित परिवार का पक्ष दिखाया है और आरोपियों के परिजनों का पक्ष नजरअंदाज किया है। युवक से मिली जनकारी के अनुसार पीड़ित परिवार से मिलने-जुलने पर बंदिश लगायी गयी है। उन्होंने बताया कि गांव के लोग बहुत डरे हुए हैं इसलिए उनके घर नहीं जा रहे हैं। कोई जाना भी चाहें वो पुलिस की वजह से नहीं जा पा रहे हैं। पीड़िता के घर के बाहर पुलिस ही पुलिस है। साथ ही बताते चले की प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बूलगढ़ी गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर रखा है। गांव में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है। हर घर के बाहर करीब दस पुलिसकर्मी है। कई जिलों से बुलाई गई फोर्स यहां तैनात की गई है।