Farmers Protest : राकेश टिकैत की चेतावनी रद्द नहीं हुए कानून तो 40 लाख ट्रैक्टर संसद का घेराव करेंगे

किसान आंदोलन के करीब अब 70 दिनों से अधिक होने को जा रहा है, और लगातार किसान अपनी आवाज को बुलंद करते जा रहे हैं। जनवरी के पहले हफ्ते में किसान आंदोलन का लहर इतनी तेज था कि लगा कि सरकार उनकी बात में आ जाएगी करीब करीब 12 से 13 दौर की वार्ता तो चली उसके बाद यह वार्ता बंद हो गई। कई बात पर सरकार अड़ी रही तो कई बार पर किसान अड़े रहे। इसलिए इस वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला।

Farmers Protest : राकेश टिकैत की चेतावनी रद्द नहीं हुए कानून तो 40 लाख ट्रैक्टर संसद का घेराव करेंगे

किसान आंदोलन के करीब अब 70 दिनों से अधिक होने को जा रहा है, और लगातार किसान अपनी आवाज को बुलंद करते जा रहे हैं। जनवरी के पहले हफ्ते में किसान आंदोलन का लहर इतनी तेज था कि लगा कि सरकार उनकी बात में आ जाएगी करीब करीब 12 से 13 दौर की वार्ता तो चली उसके बाद यह वार्ता बंद हो गई। कई बात पर सरकार अड़ी रही तो कई बार पर किसान अड़े रहे। इसलिए इस वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला।

26 जनवरी 2021 को किसान द्वारा ट्रैक्टर रैली का आयोजन किया गया था , कुछ किसान ट्रैक्टर रैली जहां होनी थी उस दिशा से भटक कर या यह कहें कि किसान उस रास्ते को छोड़ दिल्ली के अंदर घुसने लगे। और दिल्ली की शान कहे जाने वाली लाल किला पर जाकर तोड़फोड़ सहित कई चीजें करने लगे इसके बाद किसान आंदोलन पर कई बड़े गंभीर आरोप लगे। 28 जनवरी को ऐसा लगा कि किसान आंदोलन अब समाप्त हो जाएगा 26 जनवरी की घटना से किसान तो शर्मिंदा थे ही। पर देश की जनता भी किसान आंदोलन पर सवाल उठा रही थी , क्या किसानों को वाकई लाल किले पर झंडा फहराना चाहिए था. क्या यह गलत नहीं था, ऐसे तमाम आरोप किसान आंदोलन पर लग रहे थे।

परंतु 28 जनवरी की रात को सब कुछ बदल गया। 28 जनवरी की करीब रात के 8:30 बजे का समय था जब एक तरफ किसान थे और दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस थी किसान नेता राकेश टिकैत मीडिया से बात करते हुए रो गए। किसान आंदोलन जो अब खत्म होने के कगार पर था , वह अचानक से फिर एक विशाल रूप लेने लगा। राकेश टिकैत के आंसुओं ने मानव किसानों के अंदर फिर से एक आंदोलन को लेकर एकजुटता उत्पन्न कर दी और किसान फिर से हरियाणा और पंजाब से गाजीपुर बॉर्डर , सिंधु बॉर्डर के लिए रवाना होने लगे। मानो रातों-रात और करीब 2:00 बजे तक हजारों की तादाद में ट्रैक्टर और किसान सिंधु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पहुंचने लगे। किसानों को उनके नेता के आंसू बर्दाश्त नहीं हुए और राकेश टिकैत के लिए वह लोग दोबारा दिल्ली की सीमा पर जम गए।

अब खबर आ रही है कि किसान नेता राकेश टिकैत ने एक बार फिर तीनों किसी कानून को रद्द करने पर ट्रैक्टर मार्च की चेतावनी दी है , राजस्थान के सीकर में एक रैली में कहा विरोधाभासी कानूनों को निरस्त नहीं किया गया तो प्रदर्शनकारी किसान संसद का घेराव करेंगे।

अनुमान लगाए जा रहे हैं कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली में जब किसान भारी तादाद में आ सकते हैं , तो क्या इस बार किसानों की संख्या इससे दोगुनी होगी क्योंकि लगातार 28 जनवरी के बाद से किसान पंचायतो में जमी भीड़ यह बता रही है कि किसानों का मन किसान कानून को रद्द कराने के बाद ही ठंडा होगा।  क्योंकि उन्होंने अपने नेता को रोते हुए देखा है।

टिकट ने कहा इस बार संसद का घेराव होगा हम इसकी घोषणा करेंगे और फिर दिल्ली की ओर मार्च करेंगे इस बार 4 हज़ार ट्रैक्टरों के बजाय 40 लाख ट्रैक्टर होंगे। उन्होंने किसानों से दिल्ली मार्च के लिए तैयार रहने का भी आग्रह किया है। क्योंकि इसके लिए किसी भी समय आवाहन किया जा सकता है , उन्होंने कहा कि संसद का घेराव की तारीख संयुक्त मोर्चा के नेताओं द्वारा तय की जाएगी।  समाचार एजेंसी द्वारा यह भी कहा गया है कि किसान नेता ने कहा है कि वे इंडिया गेट के पास पार्क में फसलें पैदा करेंगे टिकट ने यह भी आरोप लगाया है कि 26 जनवरी को उनकी ट्रैक्टर परेड के दौरान किसानों की छवि धूमिल करने की साजिश रची गई थी। उन्होंने कहा कि हम तिरंगे से प्यार करते हैं लेकिन इस देश के नेताओं से नहीं।