किसानो के आंदोलन ने दी Supreme Court में दस्तक

किसानों और सरकार के हक की लड़ाई अब सर्वोच्च न्यायालय तक जा पहुंची है भारतीय किसान यूनियन ने तीनों कृषि बिलो के खिलाफ याचिका दायर की है जिसमें यह कहा गया है कि नए कृषि कानूनों की वजह से किसान कॉरपोरेट के लालच के आगे कमजोर होंगे। याचिका में कहा गया कि नए कानून उन्हें कॉरपोरेट सेक्टर के लालच का शिकार बना सकते हैं।

किसानो के आंदोलन ने दी Supreme Court में दस्तक
 किसानो के आंदोलन ने दी Supreme Court में दस्तक
 
कानून के विरोध में चल रहे देशभर के किसानों के आंदोलन में अब एक नई मोड़ आयी है दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान विरोध के 16 दिन किसानों ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है किसानों और सरकार के हक की लड़ाई अब सर्वोच्च न्यायालय तक जा पहुंची है भारतीय किसान यूनियन ने तीनों कृषि बिलो के खिलाफ याचिका दायर की है जिसमें यह कहा गया है कि नए कृषि कानूनों की वजह से किसान कॉरपोरेट के लालच के आगे कमजोर होंगे। याचिका में कहा गया कि नए कानून उन्हें कॉरपोरेट सेक्टर के लालच का शिकार बना सकते हैं। वहीं लगातार चल रहे विरोध प्रदर्शन  को नजरअंदाज  करने और कोई निश्चित समाधान ना देने  से बौखलाए किसान इस आंदोलन को तेज करने के  फैसले की ओर अग्रसर है ।
आंदोलन में शामिल किसानों ने ऐलान किया है कि उनकी मांगे अगर नहीं पूरी की जाए तो अब वह रेल पटरियों की ओर बढ़ेंगे और पटरी जाम करेंगे। 
इधर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को बयान में कहा कि किसानों को आंदोलन छोड़कर बातचीत करनी चाहिए।
वही दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी ने भी ट्वीट कर किसानों से निवेदन किया है कि इस तर्ज में मंत्रिमंडल से बातचीत करें इसके साथ ही उन्होंने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल के गुरुवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस की वीडियो भी साझा की ओर देखने का निवेदन किया।