कोरोना वारियर्स के हक़ में सरकार का बड़ा फैसला 123 साल पुराने महामारी अधिनियम में किया अहम संसोधन

कोरोना वायरस ने इस वक्त पुरे विश्व में अपने पैर पसार चुका है और अब तक इस वायरस की कोई पक्की दवा नहीं बन पाई है| इस वायरस ने अब तक लाखो लोगो को संक्रमित कर दिया है और हजारो काल का ग्रास बन चुके है| कई देशो में स्थति काफी खतरनाक हो चुके है रोज हजारो की जान जा रही है | इस वायरस से रोकथाम के लिए सभी अपने देशो में अपने अपने तरीको से लाकडाउन लागू कर रहे है|

कोरोना वारियर्स के हक़ में सरकार का बड़ा फैसला 123 साल पुराने महामारी अधिनियम में किया अहम संसोधन

भारत देश में भी इस वक्त लाकडाउन चल रहा है | इस जंग से लड़ने के लिए सभी अपने अपने तरीके से कोशिश कर रहे है | इसमें सबसे ज्यादा योगदान हमारे डॉक्टर, मेडिकल वर्कर, पुलिस की है जो इस वक्त इस जंग में अहम् भूमिका निभा रहे है| लेकिन इंदौर में मेडिकल वर्करों पर हुए हमले ने सबको झकझोर कर रख दिया| इंदौर का मामला इकलौता मामला नहीं है ऐसे कई और घटनाए सामने आ चुके है |  अब कैबिनेट ने इस तरह के हमलों के दोषियों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई के लिए अध्यादेश को मंज़ूरी दे दी है |

महामारी रोग अधिनियम, 1897 में संशोधन करके इस अध्यादेश में स्वास्थ्यकर्मियों को पहुंचे जख्म, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और उसे नष्ट करने के लिए मुआवजे की व्यवस्था की गई है।मोदी सरकार ने अध्यादेश के ज़रिए 123 साल पुराने कानून में संशोधन किया है|  सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने कहा कि ''मेडिकल वर्करों के प्रोटेक्शन के लिए कैबिनेट ने आर्डिनेंस जारी करने का फैसला किया है|  एपेडमिल डिसीज एक्ट 1897 में एमेंडमेंट को कैबिनेट ने एप्रूव किया है.''  बतादे इससे पहले नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों पर हमले को देखते हुए उनकी सुरक्षा को लेकर अध्‍यादेश लाई थी।| इस अध्यादेश में मेडिकल स्टाफ पर हमला करने के गंभीर मामलों में छह महीने से लेकर सात साल तक की सजा और पांच लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है| स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘ राष्ट्रपति ने इस अध्यादेश की उद्घोषणा के लिए अपनी मंजूरी दे दी है ।’

इसके साथ हि अध्यादेश के अनुसार, स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों पर हमलाकरने में  सहयोग करने पर भी  3 महीने से 5 साल तक कैद और 50 हजार से लेकर दो लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। गंभीर चोट पहुंचाने पर दोषी को छह माह से लेकर सात साल तक कैद की सजा होगी और एक लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा। इसके साथ बता दे की अब पुलिस दोषियों के खिलाफ बिना कोर्ट की इजाजत के कार्रवाई कर सकती है.  यहाँतक की अब दोषियों को जमानत भी नहीं मिल पाएगी.
और इस मामले में जांच ३० दिन में पुरे करने और १साल में सुनवाई  पूरी कर हैशाला देने का प्रावधान है  |  कैबिनेट ने  इसके साथ ही अब इंडिया कोविड-19 इमरजेंसी रिस्पांस पैकेज के लिए 15000 करोड़ की राशि के आवंटन को एक्स-पोस्ट फैकटो मंज़ूरी भी दे दी है| ऐसा पहली बार हुवा है की इस कानून में राष्ट्रीय स्तर पर एकसमान सजा का प्रावधान किया गया है|