कोरोना वायरस के कारण एक अच्छी ख़बर | वायु गुणवत्ता में सुधार | प्रदूषण घटता है | ZNDM NEWS

लोग घरो में बंद क्या हुए प्रकृति खुद को सवारने लगी | अब नीला आसमान साफ़ नजर आ रहा है, हवा की शीतलता महसूस हो रही है |  नदियों का पानी  साफ़  हो रहा है, दूर दूर तक रास्ते साफ़ दिखाई दे रहे है और अब ऐसा लग रहा है की शहर में चिड़िया भी होती है|

लोग घरो में बंद क्या हुए प्रकृति खुद को सवारने लगी | अब नीला आसमान साफ़ नजर आ रहा है, हवा की शीतलता महसूस हो रही है |  नदियों का पानी  साफ़  हो रहा है, दूर दूर तक रास्ते साफ़ दिखाई दे रहे है और अब ऐसा लग रहा है की शहर में चिड़िया भी होती है|

कोरोना वायरस को ले कर पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है|  देश के देश शहर के  शहर घरो में बंद  है | ना गाड़ियों का धुआ  है और ना ही फैक्टरियों का कचरा, सारे विश्व में बस प्रकृति का ही राज है | यही वजह  कि आज वातावरण शुद्ध हो रहा है|

वायु शुद्ध होनेका प्रभाव लॉकडाउन  के पहले दिन से ही  दिखने लगा|  सोमवार को नई दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक लगभग 93 दर्ज किया गया जो पिछले साल मार्च में यह लगभग 161 पर  था, तो वहीं वित्तीय राजधानी मुंबई का  AQI 51 दर्ज़ किया गया जो  पिछले साल मार्च में औसतन  153 पर था| आपको बता  दें Air क्वालिटी इंडेक्स  के अनुसार, वायु गुणवत्ता को 50 से कम होने पर अच्छा माना जाता है तो  AQI 153 अधिकतम है  जिस वायु की गुणवत्ता  सुधारने  के लिए देश की सरकारें करोडो रुपये झोंक चुकी है वो आज खुद ब खुद  नज़र  आ रही है |

 ग्लोबल बर्डन ऑफ डिज़ीज़ (GBD) के विश्लेषण के अनुसार, दुनिया भर में सूक्ष्म कणों (पीएम2.5) के वायु प्रदूषण के कारण होने वाली असमय मौतों में से एक चौथाई से अधि‍क भारत में होती हैं| भारत की जहरीली हवा ने 2017 में 1.24 मिलियन जीवन को दाव पर लगा दिया था। कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए देश के तमाम हिस्सों में सड़कों पर उतरने वाले वाहनों की संख्या में खासी कमी आई है। इसका असर प्रदूषण पर भी दिख रहा है। खासतौर पर नाइट्रोजन आक्साइड और पीएम 2.5 के प्रदूषण पर इसका असर दिख रहा है। सरकारी पर्यावरण निगरानी एजेंसी SAFAR के शोध के मुताबिक वर्ष 2018 और वर्ष 2019 की तुलना में मार्च 2020 के महीने में पुणे में नाइट्रोजन आक्साइड और पीएम 2.5 के प्रदूषण में 60  फीसदी, वहीं अहमदाबाद में 55  फीसदी और मुंबई में 70  फीसदी की कमी आई है।  परियोजना निदेशक का कहना है की ये , "(ड्रॉप) मुख्य रूप से वाहनों के यातायात में भारी कमी के कारण है।" नतीजतन, आमतौर पर स्मॉग में डूबे गगनचुंबी इमारतें दिखाई देती थीं और अब सामान्य से अधिक सितारें दिखाई दे रहे |