छठ पर्व 2021 :दुनिया भर में छठ पर्व की धूम जानिए कब है सूर्य अर्घ का समय

भारत वर्ष अपनी संस्कृति के लिए विश्वप्रसिद्ध है आप को बतादे छठ पर्व शुरू हो चुका है छठ पर्व का सबसे ज्यादा महत्त्व बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में ज्यादा है छठ पर्व, छठ या षष्‍ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है संतान की प्राप्ति एवं उसके सुखी जीवन के लिए हर वर्ष छठ पूजा होती है। और ये ब्रत कठिन भी माना जाता है क्यों की ये व्रत तीन दिनों का होता है। हर वर्ष दिवाली से छठे दिन छठ पूजा का आयोजन होता है।इस दिन सूर्य देव की पूजा होती है, इसलिए इसे सूर्य षष्ठी भी कहा जाता है।

छठ पर्व 2021 :दुनिया भर में छठ पर्व की धूम जानिए कब है सूर्य अर्घ का समय

भारत वर्ष अपनी संस्कृति के लिए विश्वप्रसिद्ध है आप को बतादे छठ पर्व शुरू हो चुका है छठ पर्व का सबसे ज्यादा महत्त्व बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में ज्यादा है छठ पर्व, छठ या षष्‍ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है संतान की प्राप्ति एवं उसके सुखी जीवन के लिए हर वर्ष छठ पूजा होती है। और ये ब्रत कठिन भी माना जाता है क्यों की ये व्रत तीन दिनों का होता है। हर वर्ष दिवाली से छठे दिन छठ पूजा का आयोजन होता है।इस दिन सूर्य देव की पूजा होती है, इसलिए इसे सूर्य षष्ठी भी कहा जाता है।

 


सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है।आप को बतादे ये महापर्व उत्तर प्रदेश से ज्यादा बिहार में मनाया जाता है या कह सकते है की ये  पर्व बिहारीयों का सबसे बड़ा पर्व है । छठ पर्व बिहार मे बड़े धुम धाम से मनाया जाता है। त्यौहार के अनुष्ठान कठोर हैं और चार दिनों की अवधि में मनाए जाते हैं। इनमें पवित्र स्नान, उपवास और पीने के पानी (वृत्ता) से दूर रहना, लंबे समय तक पानी में खड़ा होना, और प्रसाद (प्रार्थना प्रसाद) और अर्घ्य देना शामिल है। 

 

यहा पर्व बिहार कि वैदिक आर्य संस्कृति कि एक छोटी सी झलक दिखाता हैं। ये पर्व मुख्यः रुप से ॠषियो द्वारा लिखी गई ऋग्वेद मे सूर्य पूजन, उषा पूजन और आर्य परंपरा के अनुसार बिहार मे यहा पर्व मनाया जाता हैं।
वैसे तो छठ पर्व बिहार में बहुत महत्त्व रखता है लेकिन आप को बड़े आज धीरे-धीरे यह त्योहार प्रवासी भारतीयों के साथ-साथ विश्वभर में प्रचलित हो गया है।छठ पूजा सूर्य, उषा, प्रकृति,जल, वायु और उनकी बहन छठी म‌इया को समर्पित है छठ में कोई मूर्तिपूजा शामिल नहीं है।

 

इसबार छठ पूजा की तिथि कुछ इस प्रकार है 
08 नवंबर: दिन: सोमवार: नहाय खाय से छठ पूजा का प्रारंभ।
09 नवंबर: दिन: मंगलवार: खरना।
10 नंवबर: दिन: बुधवार: छठ पूजा, डूबते सूर्य को अर्घ्य।
11 नवंबर: दिन: गुरुवार: उगते हुए सूर्य को अर्घ्य, छठ पूजा समापन।

 

आप को बता दे छठ पूजा के पीछे कहानी है पौराणिक कथा के अनुसार प्रथम देवासुर संग्राम में जब असुरों के हाथों देवता हार गये थे, तब देव माता अदिति ने तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति के लिए देवारण्य के देव सूर्य मंदिर में छठी मैया की आराधना की थी। तब प्रसन्न होकर छठी मैया ने उन्हें सर्वगुण संपन्न तेजस्वी पुत्र होने का वरदान दिया था। इसके बाद अदिति के पुत्र हुए त्रिदेव रूप आदित्य भगवान, जिन्होंने असुरों पर देवताओं को विजय दिलायी। कहा जाता हैं कि उसी समय से देव सेना षष्ठी देवी के नाम पर इस धाम का नाम देव हो गया और छठ का चलन भी शुरू हो गया।