भारत सरकार - चेक बाउंस की कानूनी सजा जल्द होगी माफ़ - CHECK BOUNCE PUNISHMENT END SOON

[CHECK BOUNCE PUNISHMENT END SOON] बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, आरबीआई एक्ट, इंश्योरेंस एक्ट, निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट

भारत सरकार - चेक बाउंस की कानूनी सजा जल्द होगी माफ़ - CHECK BOUNCE PUNISHMENT END SOON

भारत सरकार - चेक बाउंस की कानूनी सजा जल्द होगी माफ़ - CHECK BOUNCE PUNISHMENT END SOON

नई दिल्ली | सरकार जल्द ही कुछ आर्थिक अपराध की सजा में बदलाव लाने वाली है | सरकार चाहती है कि चेक बाउंस होने को जुर्म न माना जाये बल्कि उस व्यक्ति पर जुर्माना आदि लगाकर दंडित किया जाये|  सरकार ''ईज ऑफ डूइंग बिजनेस'' में सुधार के लिए कई वित्तीय कानूनों में बदलाव पर विचार कर रही है| 

इससे कारोबारियों को कोर्ट के चक्कर काटने से छुटकारा मिलेगा. फिलहाल चेक बाउंस होने पर दो साल तक कैद का प्रावधान है. साथ ही जितने रुपये की चेक काटी गई है उसका दोगुना तक का जुर्माना लग सकता है|  वित्तीय सेवा विभाग ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अधिनियम, बीमा अधिनियम और निगोशिबल रेग्युलेशन अधिनियम के 39 अधिनियमों को डिक्रिमिनलाइज करने पर सार्वजनिक टिप्पणी मांगी है| [CHECK BOUNCE PUNISHMENT END SOON]

कौन से आर्थिक अपराध की क्या सजा है?

इनमें बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, आरबीआई एक्ट, इंश्योरेंस एक्ट और निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट शामिल हैं. मंत्रालय ने कहा है कि प्रक्रिया की खामियों और नियमों की हल्की अनदेखी से होने वाले इस तरह के अपराध हल्के होते हैं| इनसे न राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ता है और सार्वजनिक हितों को नुकसान पहुंचता है.कई ऐसे आर्थिक अपराध हैं, जिनमें जेल की सजा का प्रावधान है|  बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपोजिट स्कीम एक्ट की धारा 3 के तहत लोगों से पैसा इकट्ठा करने करने को भी अपराध की श्रेणी से हटाने की योजना बन रही है| 

इंश्योरेंस एक्ट के सेक्शन 12 और कंपनी एक्ट 147 के तहत ऑडिट में डिफॉल्ट करने पर एक साल तक की जेल की सजा और पांच लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है.सरकार ने कहा है कि कानूनी प्रक्रिया में अड़चनों और अनिश्चितता की वजह से ‘ईज ऑफ डुइंग बिजनेस’ प्रभावित होता है|  अदालतों में मामले फंसे होने की वजह से कारोबार प्रभावित होते हैं| इसलिए इस तरह के कम गंभीर अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान हटाए जाने चाहिए |