भूखे प्यासे मजदूर पैदल चलने को मजबूर |

कोरोना वायरस जैसे वैश्विक महामारी से बचने के लिए पुरे भारत में 21 दिन का लाकडाउन किया गया है और आज लॉक डाउन का 5 वां दिन है कोरोना वायरस की वजह से  इस वक्त पुरे देश में लोग डरे हुवे है | इन सबके बिच उन मजदूरों के सामने मुसीबत खड़ी  हो चुकी है जो अपने घर से दूर है और दूसरे शहरो में है अब लाकडाउन की वजह से ये सब अपने घर वापस भूखे प्यासे पैदल ही निकल पड़े है |

कोरोना वायरस जैसे वैश्विक महामारी से बचने के लिए पुरे भारत में 21 दिन का लाकडाउन किया गया है और आज लॉक डाउन का 5 वां दिन है कोरोना वायरस की वजह से  इस वक्त पुरे देश में लोग डरे हुवे है | इन सबके बिच उन मजदूरों के सामने मुसीबत खड़ी  हो चुकी है जो अपने घर से दूर है और दूसरे शहरो में है अब लाकडाउन की वजह से ये सब अपने घर वापस भूखे प्यासे पैदल ही निकल पड़े है  उत्तरप्रदेश सरकार  ने इसका संज्ञान लेते हुवे विशेष बसें चलाने जा रही है ताकि दिल्ली-एनसीआर में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके घर तक  पहुंचने में मदत मिल सके 
आप को बता दे जैसे ही इस फैसले की भनक वहा पर लोगो को लगी तभी से आनंद विहार बस अड्डे पर बेहाल लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी है । आलम ये  है की सुबह से ही मजदूर अपने घर लौटने के लिए दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग इलाकों से घंटों पैदल चलकर आनंद विहार टर्मिनल पहुंचने लगे है ,इन सभी को ये आस है शायद उन्हें भी इन बसों में थोड़ी जगह मिल जाए और वो अपने अपने घर को लौट जाए ।लेकिन इसके आलावा कई ऐसे लोग भी हैं जो अब भी किसी पर भरोसा नहीं कर रहे और घर के लिए पैदल निकल पड़े हैं| 
गाजियाबाद के लाल कुआं स्थित बस अड्डे पर भी आज काफी भीड़ देखि गई है  प्रवासी मजदूरों का यहाँ  हुजूम दिखाई पड़ा । यहां हजारों मजदूर दिल्ली, 
पैदल चल रहे इस शख्स ने बताया कि मकान मालिक किराये के लिए तंग कर रहा है, सामान महंगे होते जा रहे हैं, रोजगार बचा नहीं तो यहां रहेंगे कैसे? उन्होंने बताया कि होली के बाद गांव से आए तब से कुछ दिन कमाई हुई, लेकिन इतनी नहीं कि कुछ बचा लेते। अब जब संकट आया है तो घर लौटने के सिवा कोई चारा नहीं बचा है।
यहाँ हर मजदुर की अपनी अलग पीड़ा है हर किसी का यही कहना है कि मकान मालिक किराया मांग रहा है,  अब हम कहां से दें? सबकी पीड़ा यही है कि जिस मकान मालिक को अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा हर महीने देते हैं, वो इस भीषण संकट में ऐसे बदल गया जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। उनसे जब कहा गया कि सरकार ने तो खाने-पीने की व्यवस्था की है तो बोल फिर बोल पड़े- रहेंगे कहां?
जैसा की सबको पता है  24 मार्च को देशव्यापी लॉकडाउन घोषित किये जाने के बाद से देशभर में अभी सारी कारोबारी गतिविधियां रुक गईं है । दिल्ली-एनसीआर के भी तमाम प्रतिष्ठान बंद पड़े हैं। और यही पर सबसे ज्यादा यूपी ,बिहार, बंगाल के ज्यादातर लोग छोटी-छोटी नौकरियां करते हैं या फिर रेहड़ी-पटरी पर अपना छोटा-छोटा रोजगार चलाते हैं।औरयही पर एक बड़ी संख्या रिक्शा और ऑटो चालकों की भी है। लॉकडाउन के बाद इन सबके सामने भुखमरी की समस्या इस वक्त खड़ी हो चुकी है। ऐसे में  ये मजदुर अब घबरा गए है और इनमें किसी तरह घर पहुंचने की होड़ मची है। हालाँकि लॉकडाउन में उड़ानों से लेकर ट्रेनें और रोड ट्रांसपोर्ट, सब बंद पड़े हैं, ऐसे में पैदल चलने के सिवा कोई चारा नहीं बचा है।
कोरोना के कारण घोषित लॉकडाउन में फंसे दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा आदि से यूपी और बिहार जाने वाले मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए  यूपी रोडवेज ने 16 घंटों के दौरान 86 बसें चलाईं। बस  फिर क्या था , मजदूरों में इन बसों तक पहुंचने की होड़ मच गई। फिर सोशल डिस्टैंसिंग की तो धज्जियां उड़ गईं।दिल्ली के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के मंत्री गरीबी की मार से बेजार इन मजदूरों से बार बार अपील कर रहे हैं कि इनके लिए सभी इंतजाम दिल्ली में ही किए जाएंगे. ये अभी जहां हैं वहं ही रहें, लेकिन दिल्ली सरकार की बातें मजदूरों का भरोसा जीत पाने में नाकाम है