बीएचयू वाराणसी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.गीता ने खोज निकाली त्वरित और उचित कोरोना टेस्टिंग तकनीक |

दुनिया भर में कोरोना के बढ़ते दायरों को देखते हुए अब लोगों के लिए स्थिति और भी भयावह होती जा रही है।पिछले 1 हफ्ते में इटली के बाद,अब अमेरिका में बड़ी संख्या में लोग इस संक्रमण से प्रभावित हुए हैं और हजारों की तादाद में संक्रमित व्यक्तियों में कोई सुधार न होने कारण मृत्यु का सामना करना पड़ा है।साथ ही भारत में भी संक्रमितओं की तादाद प्रतिदिन लगभग 80 की संख्या से बढ़ रही है |

दुनिया भर में कोरोना के बढ़ते दायरों को देखते हुए अब लोगों के लिए स्थिति और भी भयावह होती जा रही है।पिछले 1 हफ्ते में इटली के बाद,अब अमेरिका में बड़ी संख्या में लोग इस संक्रमण से प्रभावित हुए हैं और हजारों की तादाद में संक्रमित व्यक्तियों में कोई सुधार न होने कारण मृत्यु का सामना करना पड़ा है।साथ ही भारत में भी संक्रमितओं की तादाद प्रतिदिन लगभग 80 की संख्या से बढ़ रही है और अब तक 38 लोगों ने इस वायरस के चलते अपनी जान गंवा दी है।लेकिन सोचने वाली बात यह है की सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन जैसे सभी महत्वपूर्ण एहतियात बरतने के बावजूद यह संख्या इतनी तेजी से बड़ कैसे रही है।तो हम बता दें कि इसका एक कारण कोरोना टेस्टिंग की 7-8 घण्टे में पूरी होने वाली प्रकिया भी हो सकती है। जी हां corona टेस्ट के लिए,या कोई व्यक्ति इस वायरस  से संक्रमित है या नहीं यह जानने के लिए जो टेस्ट किए जाते हैं उसकी पूरी अवधि 7 से 8 घंटे की है।जिसका रिपोर्ट अगले कुछ दिनों में सामने आता है।और इस अंतराल में संदिग्ध व्यक्ति कम से कम 10 से 20 लोगों के संपर्क में आ ही जाता है और अगर उस व्यक्ति का कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है तो यह ज़ाहिर है कि एक संक्रमित व्यक्ति ने लगभग 10 से 20  लोगों में इस संक्रमण को फैलाया है।इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए महीनों की जद्दोजहद के बाद काशी की बेटियों ने एक अनोखी खोज कर मिसाल कायम की है और इस विपदा की स्थिति में बहुत ही मददगार साबित होने वाला एक ऐसा तकनीक खोज निकाला है जिससे कोरोना टेस्टिंग की पूरी प्रक्रिया 7 से 8 घंटे की बजाय बहुत कम समय में हो पाएगी जिसका रिपोर्ट टेस्टिंग के 4 से 6 घंटे के भीतर ही सामने आ जाएगा।
जी हाँ बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ मॉलिक्यूलर एंड ह्यूमन जेनेटिक्स की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गीता राय और उनके तीन शोध छात्रा, डॉली दास, खुशबू प्रिया और हीरल ठक्कर की टीम ने ऐसी तकनीक का अविष्कार किया है जिसमें उनका दावा है कि कम खर्च में कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट 4 से 6 घंटे की अवधि में सामने आ जाएगा।बता दे कि यह आरटी- पीसीआर आधारित  कोरोना जांच की तकनीक, दूसरे तकनीकों से काफी किफायती भी है और इससे कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों का कोरोना टेस्ट किया जा सकेगा।
इस तर्ज में डॉ. गीता ने बताया कि यह जांच तकनीक वॉयरल स्ट्रेन में एक अनोखी प्रोटीन सीक्वेंस को टारगेट करता है जो सिर्फ कोविड-19 में ही मौजूद होती है। उन्होंने बताया कि इस अनोखी तकनीक को पेटेंट कराने की प्रक्रिया भी फाइल कर दी गई है साथ ही आईसीएमआर और सीडीएससीओ को अवगत कर अब बस अप्रूवल का इंतजार है।और अप्रूवल मिलने के बाद इस तकनीक को किट में तब्दील करने के लिए एक इंडस्ट्रियल पार्टनर की जरूरत होगी जिसके बाद किट को मार्केट में लाया जा सकेगा।