जल्द राष्ट्रीय शर्करा संस्थान और बीएचयू इथेनॉल उत्पादन के साथ चीनी के शीरे से अल्कोहल बढ़ने पर होगा साथ काम

बीएचयू में अब जल्द ही चीनी के शीरे से अल्कोहल उत्पादन की मात्रा बढ़ाने के लिए बीएचयू अब कानपुर के राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआइ) के साथ मिलकर काम करेंगे। इसके लिए वाराणसी एनएसआइ के पूर्व छात्र व बीएचयू के कुलपति प्रो. राकेश भटनागर कानपुर जाकर एनएसआइ का निरीक्षण भी किया। और फैसला लिया गया की खमीर की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बीएचयू संग काम किया जाएगा ।

जल्द राष्ट्रीय शर्करा संस्थान और बीएचयू इथेनॉल उत्पादन के साथ चीनी के शीरे से अल्कोहल बढ़ने पर होगा साथ काम
  बीएचयू में अब जल्द ही चीनी के शीरे से अल्कोहल उत्पादन की मात्रा बढ़ाने के लिए बीएचयू अब कानपुर के राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआइ) के साथ मिलकर काम करेंगे। इसके लिए वाराणसी एनएसआइ के पूर्व छात्र व बीएचयू के कुलपति प्रो. राकेश भटनागर कानपुर जाकर एनएसआइ का निरीक्षण भी किया। और फैसला लिया गया की खमीर की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बीएचयू संग काम किया जाएगा ।

 इसके साथ ही बीएचयू एनएसआइ के सहयोग से इथेनाल के उत्पादन पर भी तेजी से काम करने की बात की जा रही है । सूत्रों के अनुसार इसके लिए एनएसआइ के निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन बीएचयू आएंगे और दोनों संस्थानों के मध्य मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर की बात की जा रही है । इसके बाद दोनों संस्थान एक-दूसरे का शोध और अनुसंधान को साझा कर उच्च गुणवत्ता के अल्कोहल का उत्पादन करेंगें।

बतादे बीएचयू के कुलपति प्रो. राकेश भटनागर अपने कानपुर दौरे के दौरान उन्होंने ही तकनीकी जानकारियों को जाना और बीएचयू के उनके साथ मिलकर काम करेगा, इस पर सहमति भी बनी। प्रो. मोहन के मुताबिक, चीनी के शीरे में खमीर की क्वालिटी जितनी बेहतर होगी, कृषि अवशेषों और किचन से निकलने वाले बेकार वस्तुओं से बायो गैस तैयार की जाएगी।

 इस दौरान सबसे पहले उन्होंने जैव रसायन, कार्बनिक रसायन, कृषि रसायन और शर्करा प्रौद्योगिकी अनुभाग की प्रयोगशालाओं में विकसित किए गए अनुसंधानों को देखा। गन्ने की बेकार खोई से निर्मित खाने युक्त फाइबर, बिस्कुट और अन्य मूल्यवर्धित वस्तुएं पर भी सूक्ष्म दृष्टि डाली। वहीं एनएसआइ के निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन ने उन्हें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गुड़, फ्लेवर्ड चीनी के बारे में जानकारी दी।


आप को बता दे बीच बीएचयू के कुलपति प्रो. राकेश भटनागर एनएसआइ के पुरातन छात्र है और अपने संस्थान में आ कर काफी खुश नजर आए | अनुमान लगाया जा रहा है की इस प्रोजेक्ट पर फरवरी के पहले सप्ताह में अमली जामा पहनाया जा सकता है |