पितृ पक्ष स्पेशल -भारत का एक मात्र कुंड जहां होता है त्रिपिंडी श्राद्ध

वाराणसी बनारस काशी चाहे जिस भी नाम से आप इस नगरी को बुला ले ये अपने आप में अलग है काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है यहाँ पर बहुत से कुंड,तालाब,घाट है जीसके पीछे बहुत सी कहानियाँ है | वैसे तो काशी को मोक्ष की नगरी कही जाती है पर यहाँ के हर कुंड का अपना इतिहास और अलग महत्व है।

वाराणसी बनारस काशी चाहे जिस भी नाम से आप इस नगरी को बुला ले ये अपने आप में अलग है काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है यहाँ पर बहुत से कुंड,तालाब,घाट है जीसके पीछे बहुत सी कहानियाँ है | वैसे तो काशी को मोक्ष की नगरी कही जाती है पर यहाँ के हर कुंड का अपना इतिहास और अलग महत्व है। ऐसा ही एक कुंड है पिशाचमोचन कुंड जो शहर लहुराबीर क्षेत्र में स्थित है वैसे तो इस कुंड का महत्त्व हमेशा रहता है लेकिन सबसे ज्यादा इसका महत्त्व बढ़ जाता है पितृपक्ष में।

इस कुंड पर काशी या अन्य जिले से ही नहीं विदेशो से भी लोगो आते है वैसे तो कहानियो और मान्यता के अनुसार काशी में जिसकी भी मौत होती हो उसे मोक्ष मिल जाता है, लेकिन इस कुंड पर अकाल मौत या अन्य अन्य किसी वजह से भटकती आत्माओं को मोक्ष मिलता है। जब हम इस कुंड पर पहुंचे तो हमें यहाँ पर एक पीपल का पेड़ दिखाई दिया और ये पेड़ अन्य पेड़ो की तरह नहीं ये कुछ अलग था इस पेड़ पर मान्यता के अनुसार पीपल के वृक्ष पर भटकती आत्माओं को बैठाया जाता है।

इस दौरान पेड़ पर सिक्का रखवाया जाता है ताकि पितरों का सभी उधार चुकता हो जाए और पितर सभी बाधाओं से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त कर सकें और यजमान भी पितृ ऋण से मुक्ति पा सके। और सायद यही वजह है कि यहां देश भर से लोग आते हैं और तर्पण करते हैं।  सबसे बड़ी बात आप को बतादे की लोगो का कहना है भारत में सिर्फ पिशाच मोचन कुंड पर ही त्रिपिंडी श्राद्ध होता है, इस कुंड का बखान गरुड़ पुराण में भी किया गया है। काशी खंड की मान्यता के अनुसार पिशाच मोचन मोक्ष तीर्थ स्थल की उत्पत्ति गंगा के धरती पर आने से भी पहले से है।

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