अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि भव्य मंदिर का निर्माण - उत्तर प्रदेश समाचार

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में 15 ट्रस्टी होंगे जिसमें से एक ट्रस्टी हमेशा दलित समाज से रहेगा इसमें राजनीति से जुड़ा कई भी प्रतिनिधि नहीं होगा।।दलितों को ट्रस्ट में शामिल करना सांकेतिक भी हो सकता है, क्यूकि विश्व हिन्दू परिषद ने  ८० के दशक में  कामेशवर नाम के एक व्यक्ति जो कि दलित समाज से आते है उनसे जनम भूमि की पहली ईंट रखवाई थी।पहले जहाँ दलितों को मंदिरों में घुसने  तक की भी  इजाजत नहीं थी, वहीँ सरकार का दलितों के उत्थान के लिए कारगर साबित होगा | बताया जा रहा है की अयोध्या के राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप सिंह को भी ट्रस्टी में शामिल किया जायेगा | 

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि भव्य मंदिर का निर्माण - उत्तर प्रदेश समाचार

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि भव्य मंदिर का निर्माण - उत्तर प्रदेश समाचार 

केंद्र सरकार ने राममंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ का गठन किया है।  तीन माह में ट्रस्ट बनाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मियाद 9 फरवरी को खत्म होने  से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को संसद में यह जानकारी देते हुए कहा कि राममंदिर निर्माण मेरे दिल के बेहद करीब है। 


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, अयोध्या कानून के तहत,67.703 एकड अधिकृत संपूर्ण जमीन, जिसमें भीतरी और बाहरी आंगन भी शामिल है उसे नवगठित श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दिया जाएगा। यह ट्रस्ट अयोध्या में भव्य और दिव्य श्रीराम मंदिर निर्माण और संबंधित विषयों पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा। वहीं, पीएम ने यह भी जानकारी दी कि अयोध्या में मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने का अनुरोध उत्तर प्रदेश सरकार से किया गया जिस पर प्रदेश सरकार सहमति मिल गई है। 

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने लोकसभा में बुधवार सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद संबोधित किया। गौरलब है कि, बिते साल 9 नवंबर को राममंदिर पर ऐतिहासिक फ़ैसला हुआ था। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार श्रीराम जन्मस्थली पर भव्य मंदिर के निर्माण के लिए और इससे जुडे़ अन्य विषयों के लिए एक विशाल योजना तैयार की है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक एक स्वायत्त ट्रस्ट श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया है। सरकार ने ट्रस्ट निर्माण से संबंधित गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया।
पीएम ने अपने 8 मिनट 45 सेकंड के संबोधन में  कहा कि  "हिंदुस्तान में हर पंथ के लोग चाहे हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई हों या बौद्ध, पारसी जैन हों, हम सब एक परिवार के सदस्य हैं। इस परिवार के हर सदस्य का विकास हो, वे सुखी रहें, स्वस्थ रहें, देश का विकास हो इसी भावना के साथ मेरी सरकार सबका साथ, सबका विश्वास के मंत्र पर चल रही है। आइए, इस ऐतिहासिक क्षण में हम सभी सदस्य मिलकर अयोध्या में श्रीराम धाम के जीर्णोद्धार के लिए, भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए, एक स्वर में अपना समर्थन दें।"

ट्रस्ट कैसा होगा?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में 15 ट्रस्टी होंगे जिसमें से एक ट्रस्टी हमेशा दलित समाज से रहेगा इसमें राजनीति से जुड़ा कई भी प्रतिनिधि नहीं होगा।।दलितों को ट्रस्ट में शामिल करना सांकेतिक भी हो सकता है, क्यूकि विश्व हिन्दू परिषद ने  ८० के दशक में  कामेशवर नाम के एक व्यक्ति जो कि दलित समाज से आते है उनसे जनम भूमि की पहली ईंट रखवाई थी।पहले जहाँ दलितों को मंदिरों में घुसने  तक की भी  इजाजत नहीं थी, वहीँ सरकार का दलितों के उत्थान के लिए कारगर साबित होगा | बताया जा रहा है की अयोध्या के राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप सिंह को भी ट्रस्टी में शामिल किया जायेगा | 


यूपी के कैबिनेट मंत्री और प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि अयोध्या मुख्यालय से 18 किमी दूर ग्राम धानीपुर, तहसील सोहावल रौनाही थाने के 200 मीटर के पीछे पांच एकड़ जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने के लिए मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। यह जमीन लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर अयोध्या से करीब 22 किमी पहले है। 
क्या-क्या होगी ट्रस्ट की  ज़िम्मेदारियां  और अधिकार - 

श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट  राम मंदिर निर्माण की रूप रेखा और आगे किस तरह से काम करना है, इसका रोडमैप तैयार करेगा|राम मंदिर ट्रस्ट के सभी ट्रस्टी बोर्ड किसी एक ट्रस्टी को प्रेसिडेंट- मैनेजिंग ट्रस्टी नियुक्त करेंगे, जो सभी बैठकों की अध्यक्षता करेगा| वहीं, जनरल सेक्रेटरी और कोषाध्यक्ष को भी इन्हीं सदस्यों में से नियुक्त किया जाएगा| केंद्र सरकार का ट्रस्ट के कामकाज में कोई दखल नहीं होगा| ट्रस्ट राम मंदिर निर्माण से जुड़े हर फैसले, श्रद्धालुओं के लिए सभी तरह की सुविधाएं जैसे- अन्नक्षेत्र, किचन, गौशाला, प्रदर्शनी, म्यूजियम और सराय पर फैसला लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होगा| कानूनी रूप से ट्रस्ट श्रद्धालुओं की सुविधाओं और मंदिर निर्माण के लिए  किसी भी व्यक्ति, संस्था से दान, अनुदान, अचल संपत्ति और सहायता इसके अलावा लोन भी ले सकता है|  मंदिर के लिए प्राप्त किए गए दान का इस्तेमाल सिर्फ ट्रस्ट के कामों के लिए किया जाएगा|  किसी अन्य काम के लिए इस धन का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा| राम मंदिर के लिए मिलने वाले दान और खर्च का हिसाब ट्रस्ट को रखना होगा | इसकी हर साल का बैलेंस शीट बनाएगी जाएगी और चार्टर्ड एकाउंटेंट ट्रस्ट के खातों का ऑडिट करेगा. राममंदिर ट्रस्ट के सदस्यों को वेतन का प्रावधान नहीं है, लेकिन सफर के दौरान हुए खर्च का भुगतान ट्रस्ट के द्वारा किया जाएगा|