अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए RBI से बड़ी राहत, सस्ता लोन और EMI पर दी तीन महीने की छूट

कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन के बीच देश की इकोनॉमी को बूस्ट देने के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं|  इस दौरान देश की अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए  रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने  आज बड़ा एलान किया है| RBI के  गवर्नर शशिकांत दास ने बताया कि  रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने  रेपो रेट में 75  बेसिस प्वाइंट की कटौती की है|  इस कटौती के बाद अब रेपो रेट घटकर 4.4 फीसदी रह गया है|

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए RBI से बड़ी राहत, सस्ता लोन और EMI पर दी तीन महीने की छूट

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए RBI से बड़ी राहत, सस्ता लोन और EMI पर दी तीन महीने की छूट

कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन के बीच देश की इकोनॉमी को बूस्ट देने के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं|  इस दौरान देश की अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए  रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने  आज बड़ा एलान किया है| RBI के  गवर्नर शशिकांत दास ने बताया कि  रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने  रेपो रेट में 75  बेसिस प्वाइंट की कटौती की है|  इस कटौती के बाद अब रेपो रेट घटकर 4.4 फीसदी रह गया है|  रेपो रेट में  कटौती का फायदा होम, कार या अन्य तरह के लोन सहित कई तरह के ईएमआई भरने वाले करोड़ों लोगों को मिलने की उम्मीद है|  इसके साथ ही नए लोन लेने वाले ग्राहकों को भी फायदा मिलेगा|  इसके साथ ही आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट में भी 90 बेसिस प्वाइंट कटौती करते हुए 4 फीसदी कर दी है| ब्याज दरें घटाने का मतलब है कि अब बैंको को  RBI से बेसिस फंड लेंने पर, उन्हें नई सस्ती दर पर फंड (पैसे)  मिलेगा| और इस छूट का  फायदा बैंक अपने उपभोक्ताओ को भी देंगे| इसी वजह से जब भी रेपो रेट घटता है तो ग्राहकों के  लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है|

क्या है रेपो रेट
जिस रेट पर आरबीआई कमर्शियल बैंकों और दूसरे बैंकों को लोन देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं. रेपो रेट कम होने का मतलब यह है कि बैंक से मिलने वाले लोन सस्ते हो जाएंगे. रेपो रेट कम हाेने से होम लोन, व्हीकल लोन वगैरह सभी सस्ते हो जाते हैं.

क्या होता है रिवर्स रेपो रेट
जिस रेट पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं. रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी को नियंत्रित करने में काम आती है. बहुत ज्यादा नकदी होने पर आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देती है.

क्या है SLR
जिस रेट पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते हैं, उसे एसएलआर कहते हैं. नकदी को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. कमर्शियल बैंकों को एक खास रकम जमा करानी होती है, जिसका इस्तेमाल किसी इमरजेंसी लेन-देन को पूरा करने में किया जाता है.

क्या है CRR
बैंकिंग नियमों के तहत सभी बैंकों को अपनी कुल नकदी का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास जमा करना होता है, जिसे कैश रिजर्व रेशियो यानी सीआरआर कहते हैं|  आरबीआई ने कैश रिजर्व रेशियो (CRR) में भी 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती करके 3 प्रतिशत कर दिया है|

क्या है MSF
आरबीआई ने इसकी शुरुआत साल 2011 में की थी. एमएसएफ के तहत कमर्शियल बैंक एक रात के लिए अपने कुल जमा का 1 फीसदी तक लोन ले सकते हैं.

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आरबीआई गवर्नर शशिकांत दास  के मुताबिक सभी कमर्शियल बैंकों को ब्याज और कर्ज अदा करने में 3 महीने की छूट दी जा रही है|  इस फैसले से 3.74 लाख करोड़ रुपये की नकदी सिस्टम में आएगी| आरबीआई गवर्नर ने इसके साथ ही लोगों से डिजिटल बैंकिंग की सलाह दी है| उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित और मजबूत है|