महंत नरेंद्र गिरि के मामले में 5 पेज के सुसाइड नोट पर उठे सवाल

महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या का मामला अब पूरी तरह से पेचीदा होता जा रहा है जहा एक तरफ महंत जी के कमरे से सुसाइड नोट बरामद हुवा है जिसमे उन्होंने इस मामले के आरोपी आनंद पर आरोप लगाए है तो वही दूसरी तरफ कई लोगो का दावा है महंत नरेंद्र गिरि बहुत मुश्किल से अपना हस्ताक्षर कर पाते थे तो वो इतना बड़ा सुसाइड नॉट कैसे लिख सकते है

महंत नरेंद्र गिरि के मामले में  5 पेज के सुसाइड नोट पर उठे सवाल

 

महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या का मामला अब पूरी तरह से पेचीदा होता जा रहा है जहा एक तरफ महंत जी के कमरे से सुसाइड नोट बरामद हुवा है जिसमे उन्होंने इस मामले के आरोपी आनंद पर आरोप लगाए है तो वही दूसरी तरफ कई लोगो का दावा है महंत नरेंद्र गिरि बहुत मुश्किल से अपना हस्ताक्षर  कर पाते थे तो वो इतना बड़ा सुसाइड नॉट कैसे लिख सकते है लोगो ने यहाँ सवाल खड़े कर दिए है की जो व्यक्ति बमुश्किल अपने हस्ताक्षर बना पाता था और इसमें उसको 2-3 मिनट लगते थे उसने 5 पेज का सुसाइड नोट कितने दिन में लिखा होगा? पुलिस कह रही है कि महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के मामले में नरेंद्र गिरि के कमरे से सुसाइड नोट मिला है। इसमें उनके शिष्य आनंद गिरि का जिक्र है। पुलिस ने कहा कि हम मामले की जांच कर रहे हैं। सुसाइड नोट वसीयत की तरह है। शिष्य आनंद गिरि से नरेंद्र गिरि दुखी थे।

 

 

महंत नरेंद्र गिरि ने अपने परम शिष्य आनंद गिरि पर खुद कार्रवाई कर उन्हें निरंजनी अखाड़े से निष्कासित कर दिया था। इस पर आनंद गिरि ने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को एक चिट्ठी लिखी थी और कहा था  

मैं स्वामी आनंद गिरी, शिष्य श्री महंत नरेंद्र गिरि जी महाराज बाघम्बरी बड़े हनुमान मंदिर प्रयागराज।सादर अवगत कराना है कि महाराज जी मैं बाघमबारी गद्दी से 2005 से जुड़ा और 2000 में इनका शिष्य बना था। हरिद्वार में निरंजनी अखाड़े में 2003 में मैं थानापति बनकर बड़ोदरा अखाड़े के मंदिर में पुजारी के रूप में गया और 2004 में गुरुजी हमारे मठ बाघम्बरी गद्दी के महंत बने। महंत बनने के बाद सबसे पहले विद्यालय की इन्होंने एक जमीन को बेचा, जिसमें अखाड़ा विरोध में खड़ा हो गया और इनको हटाने की कार्यवाही करने लगा। उस समय मुझे इन्होंने फोन करके बुलाया और रोने लगे कहा- बेटा मेरा कोई नहीं है। आज अखाड़ा मेरे खिलाफ हो गया है। मुझसे गलती हुई। मैंने जमीन बेच दी। तू मेरा शिष्य बनकर अगर आ जाएगा तो मैं तुझे महंत बना दूंगा। उस समय मैंने इनका साथ दिया। मैंने अखाड़े को कहा था कि गुरु पहले हैं फिर अखाड़ा।

 

 

 

फिर महाराज जी एक बड़ा घटनाक्रम हुआ। एक रेलवे के आईजी साहब थे आरएन सिंह। उनके साथ भी घनिष्ठ मित्रता हुई और उनके परिवार के साथ जमीन बेचने को लेकर बात हुई, तब भी मैंने विरोध किया था। मैंने कहा-महाराज मठ की जमीन बेचेंगे तो पूरा समाज हमारे खिलाफ हो जाएगा। इस बात से आरएन सिंह नाराज हुए और हमारे खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आईजी आरएन सिंह जी मंदिर पर धरने पर बैठे और मंदिर के महंत एवं हम लोगों पर कार्यवाही की मांग करने लगे। फिर जनेश्वर मिश्रा जी से बात हुई।जनेश्वर मिश्रा जी ने मुलायम सिंह जी से बात की और आरएन सिंह को सस्पेंड किया। तब हमारा मठ और हम लोग बचे।

 

 

फिर 2011 में इनकी मित्रता महेश नारायण सिंह नाम के एक राजनीतिक व्यक्ति से हुई। महेश इनके पारिवारिक मित्र थे। इसके बाद भूमाफिया शैलेंद्र सिंह को सात बीघा मठ की जमीन बेच दी गई और उसमें से 2 बीघा जमीन शैलेंद्र सिंह ने महेश नारायण को तोहफे में दे दी। इस बात की जानकारी हमको नहीं थी। जमीन बेचने के बाद स्वामी जी मंदिर की गद्दी पर बैठे-बैठे ही गिर गए। हम और पुजारी सब लोग भागे इनको अस्पताल ले गए। हमने पूछा क्या हुआ महाराज जी तो बोले बेटा मुझसे बड़ा अपराध हो गया है। मैंने मठ की सात बीघा जमीन को बेच दिया है। 2011 में महेश नारायण चुनाव जीत कर के आए और उसी दिन मठ पर हमला बोल दिया।लगभग 50 से अधिक राइफल धारियों ने मठ को घेर रखा था। मेरे हस्तक्षेप के बाद एसपी सिटी दफ्तर में मामला गया। जमीन की कीमत 40 करोड़ थी। मैंने कहा गुरुजी आपने ये क्या किया। इससे तो मत खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा बेटा चिंता मत करो मैं तुम्हारी सौगंध खाता हूं मैं 10 करोड़ से अधिक पैसों से जमीन खरीदूंगा। परंतु वादा वादा ही रहा। इन्होंने कभी मठ के लिए कोई जमीन नहीं खरीदी। 2018 में फिर लगभग 80 बीघा जमीन मेरे नाम पर लीज कर दी गई और कहा गया कि हम इस पर भविष्य में पेट्रोल पंप खोल देंगे, लेकिन हम इसे बेचेंगे नहीं। फिर 2020 में उन्होंने मुझसे कहा कि बेटा जमीन लीज कैंसिल कर दो। मुझे पैसों की बहुत जरूरत है। मैंने कहा कि अब एक इंच जमीन नहीं बिकेगी। मुख्यमंत्री जी यहीं से विवाद शुरू हुआ।

 

 

 

2019 में भी मेरे ऊपर एक बड़ा भारी प्राणघातक षड्यंत्र रचाया गया। मैं विदेश में ऑस्ट्रेलिया में था। 2 महिलाओं के द्वारा अभद्रता का एक आरोप लगाकर मुझे फंसाया गया। मेरे नाम पर इन्होंने यहां पर 4 करोड़ से अधिक रुपए लोगों से लिए और यह कहा कि मुझे आस्ट्रेलिया पैसा भेजना है, आनंद गिरि को छुड़ाने के लिए। परंतु सच्चाई महाराज जी यह है कि ऑस्ट्रेलिया में मेरी कोई गलती नहीं थी। मेरा आरोप सिद्ध नहीं हुआ। लिहाजा वहां की कोर्ट ने मुझे बाइज्जत बरी किया और मेरे अपने जो शिष्य लोग वहां हैं उन लोगों ने मेरी पूरी सेवा की। एक भी रुपया हिंदुस्तान से नहीं भेजा गया। फिर भी मेरे नाम पर इन्होंने इतना पैसा उठाया और आज तक उन लोगों को पैसा नहीं दे रहे हैं।