WHO ने दी चेतावनी, बाकी है अभी इस वायरस का सबसे घातक रूप देखना

कोरोना के संक्रमण पर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने 20 अप्रैल को चेतावनी देते हुए कहा कि इस वायरस का सबसे घातक और खतरनाक स्टेज दिखना अभी बाकी है| चीन के वुहान से फैले कोविड-19 संक्रमण वायरस की गिरफ्त में आए लगभग सभी देश लॉकडाउन या प्रतिबंध झेल रहे हैं| हफ्तों लॉकडाउन में रहने से देश विदेश की आर्थिक स्थिति औंधे मुँह गिर गयी है |

WHO ने दी चेतावनी, बाकी है अभी इस वायरस का सबसे घातक रूप देखना

 

हफ्तों गुजरने के बाद विभिन्न देशों की सरकारें स्थिति को सुधारने और इसे काबू में लाने के लिए धीरे-धीरे ये प्रतिबंध कम करने की कोशिश कर रही हैं| जैसे कई देशों में कई सेवाएं खुल रही हैं| ऐसे में WHO प्रमुख  टेड्रोस ऐडनम गेब्रीयेसुस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) ये चेतावनी दी है कि संक्रमण अभी खत्म नहीं हुआ, बल्कि फिर लौट सकता है और अबकी बार ज्यादा खतरनाक होकर लौटेगा| इससे पहले भी संगठन ये चेतावनी दे चुका है|  WHO की ये चेतावनी  तब आई है, जब दुनियाभर में संक्रमण का आंकड़ा 24 लाख 80 हजार पहुंच चुका है|

WHO प्रमुख टेड्रोस ने साल 1918 में फैले स्पैनिश फ्लू से इसकी तुलना करते हुए कहा कि वो बीमारी एक के बाद एक करके तीन बार लौटी थी| जैसे ही लोग असावधान होंगे, कोरोना का घटता कहर फिर लौटेगा और ज्यादा प्रभावी होकर लौटेगा| वैज्ञानिक भी इसकी तुलना इसी बीमारी से कर रहे हैं|

साइंस जर्नल में प्रकाशित हुई एक महत्वपूर्ण स्टडी के अनुसार कोरोना की एक लहर के बाद भी ये बीमारी खत्म होगी या नहीं, इसपर कई बातें असर डालेंगी| 1-  मौसम यानी तापमान का घटना -बढ़ना, मना जा रहा है  कि गर्मी में वायरस का सर्वाइवल मुश्किल होगा और संक्रमण की दर तेजी से घटेगी|  हालांकि अब तक इस तथ्य की पुष्टि नहीं हो सकी है|
2- वायरस कब लौटेगा, इसमें एंटीबॉडी भी एक अहम भूमिका निभा सकती है| जैसे अगर वायरस का पहला हमला झेल चुके शख्स के शरीर में एंडीबॉडी लंबे वक्त तक असरदार रही तो वायरस का अटैक तभी दिखेगा जब ये कमजोर पड़ जाएगा |
3-  इस वायरस का असर खत्म होने में अगर 2 साल लगेंगे  तो ये दो साल बाद भी लौट सकता है |
4-  सालभर या कुछ महीनों में ही अगर कोविड-19 के खिलाफ एंटीबॉडी कमजोर पड़ जाए, जैसा कि मौसमी फ्लू के मामले में दिखता है तो कोरोना का अगला हमला कुछ ही महीनों के भीतर दोबारा हो सकता है|

वैज्ञानिक कर रहे है शोध 
प्रमाणों के आधार पर वैज्ञानिको का कहना है कि अगर कोरोना वायरस हर साल सर्दी और वसंत के बीच आएगा तो संक्रमण उतना खतरनाक नहीं होगा, जबकि सर्दी और पतझड़ के बीच इसका आउटब्रेक काफी खतरनाक हो सकता है|  वैज्ञानिक सीरोलॉजिकल जांच पर भी जोर दे रहे है|  इससे एक बार कोरोना संक्रमित हो चुके शख्स के शरीर में एंटीबॉडी की जांच से देखा जा सकेगा कि इम्युनिटी कितने वक्त तक काम करती है और इसी से अंदाजा लगाया जा सकेगा कि वायरस का अगला हमला कब होगा|

दोबारा दिख रहा है मामला
WHO और दूसरे वैज्ञानिकों की लगातार चेतावनी के बीच इसपर ध्यान दिया जा रहा है कि क्या वायरस दोबारा लौट रहा है| उत्तरी चीन में इसके छुटपुट मामले आने लगे हैं| लेकिन वहां पर आए या रह रहे विदेशियों में इसका प्रतिशत ज्यादा होने की वजह से चीन इसे फॉरेन वायरस की तरह देख रहा है| सिंगापुर में भी ये दोबारा लौटता दिख रहा है|  दक्षिण कोरिया में भी हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने के बाद मरीज दोबोरा कोविड-19 संक्रमण के शिकार हो रहे हैं|

लॉकडाउन रुक-रुक किया जाए
ये भी माना जा रहा है कि वन-टाइम लॉकडाउन यानी वो लॉकडाउन जो लंबे समय तक चले, खास असरदार नहीं होगा क्योंकि प्रतिबंधों के दौरान घर में बंद बड़ी आबादी में रोग प्रतिरोधक क्षमता नहीं होगी|  ऐसे में प्रतिबंध खत्म होने के बाद बाहर निकलने पर कोरोना का हमला ज्यादा खतरनाक हो सकता है| हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के Harvard T.H. Chan School of Public Health विभाग में ये स्टडी हुई, जिसके नतीजे साइंस मैगजीन में आए|  हार्वर्ड की स्टडी में साफ बताया गया है कि जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती, थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद लगातार अगले 2 सालों तक सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना पड़ सकता है|  इसके बाद भी अगर वायरस खत्म होता लगे तो भी नजर रखनी होगी क्योंकि कभी भी ये वायरस दोबारा हमला कर सकता है| 

https://youtu.be/0xRECzypeQs