लाकडाउन की मार बनारसी साड़ी व हस्तकला उधोग को 2000 करोड़ का नुकसान

वाराणसी की जनता ने लाकडाउन का पूर्ण रूप से पालन तो किया है लेकिन यहाँ के व्यापारियों को बहुत घाटा हुवा लाकडाउन का इतना बुरा असर हुवा है की कई व्यापारियों ने अपने चले आ रहे पुश्तैनिक व्यवसाय को भी बदलने का मन बना लिया है | Banarasi Saree | Hastakal Udhyog |

लाकडाउन की मार बनारसी साड़ी व हस्तकला उधोग को 2000 करोड़ का नुकसान

 

लेकिन कुछ हुनर मंद ऐसे भी है जो साह कर भी अपना व्यवसाय नहीं बदल सकते और इस लाकडाउन में उन्हें बहुत बड़ा झटका भी लगा है हम बात कर रहे है  बनारस की पहचान बनारसी साडी , वस्त्र व हस्तकला उद्योग की जिसमे व्यवसाइयों को करीब 2000 करोड़ रुपये का घटा हुवा है । और इसके साथ ही इस व्यवसाय से जुड़े करीब पांच लाख से ज्यादा बुनकरों और शिल्पियों के सामने रोजगार का संकट आ खड़ा हुवा है ।  और वही गुलाबी मीनाकारी लकड़ी के खिलौने पीतल के बर्तन मिट्टी लकड़ी व शीशे की माला व आर्टिफिशियल ज्वेलरी का कारोबार भी करीब दो माह से बंद पड़ा हुआ है। हस्तशिल्प उत्पाद काफी मात्रा में हर साल निर्यात होते हैं। बनारस व आसपास के जिलों में तैयार होने वाल हथकरघा व हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात व देश के अन्य राज्यों में न होने से करीब 2000 करोड रुपए का नुकसान हुआ है।

वैसे तो लाकडाउन मार्च माह के अंतिम सप्ताह से लगाया गया है | लेकिन बनारसी साड़ी की बुनाई और कारोबार पर जनवरी फरवरी से ही असर दिखने लगा था। बतादे  बनारसी साड़ियों को बनाने के लिए पावरलूम पर चीनी रेशम का ही इस्तेमाल होता है। लेकिन 2020  के शुरुआत में हि चीन में कोरोना का संकट एक रौद्र रूप ले लिया था जिस वजह से चीन से आने वाले रेशम की कीमत बढ़ गई थी  थी जिसका असर लागत पर पड़ने लगा था।  बतादे केवल बनारस में करीब 90 हजार बुनकर परिवारों में पावरलूम पर साड़ी की बुनाई होती है। ये व्यवसाय इनकी पुस्तैनिक धरोहर भी है |  अब वैसे भी लॉकडाउन की वजह से बनारसी साड़ियों का कारोबार औंधे मुँह गिरा है|