वाराणसी में मानया गया वट सावित्री पर्व

आज वाराणसी में वट सावित्री का पर्व काफी धूम धाम से मनाया गया लेकिन लाकडाउन होने की वजह से ज्यादातर लोगो ने घरो में रह कर पूजा की बतादे इस पर्व की हिंदू धर्म में बहुत मान्यता है महिलाए अपने पति की लंबी उम्र के लिए ये व्रत रखे जाते हैं क्योकि वट सावित्री के व्रत का अपना अलग ही महत्व है |

वाराणसी में मानया गया वट सावित्री पर्व
वट सावित्री पर्व

 

धार्मिक मान्यता के अनुसार  ज्येष्ठ मास के व्रतों में वट अमावस्या का व्रत बहुत प्रभावी माना जाता है इस दिन सभी सुहागन महिलाएं व्रत रखती हैं और वट वृक्ष की पूजा करती हैं | साथ ही स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु एवं सभी प्रकार की सुख-समृद्धियों की कामना करती हैं | इस बार वट सावित्री का व्रत 22 मई 2020 को है | वैसे तो भारत के ज्यादातर राज्यों में ये पर्व मनाया जाता है लेकिन  बिहार और उत्तर प्रदेश में इस व्रत के काफी धूम धाम से मनाया जाता है क्यों की यहाँ पर अपना एक अलग महत्व है  |

पुराणों में यह स्पष्ट किया गया है कि वट में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का वास है | मान्यता अनुसार इस व्रत को करने से पति की अकाल मृत्यु टल जाती है |

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


एक कहानी के अनुसार वटवृक्ष के नीचे सावित्री ने अपने पति व्रत की प्रभाव से मृत पड़े सत्यवान को पुनः जीवित किया था | तभी से इस व्रत को वट सावित्री नाम से ही जाना जाता है| वट अर्थात बरगद का वृक्ष आपकी हर तरह की मन्नत को पूर्ण करने की क्षमता रखता है | और इस पूजा में पीपल और वट वृक्ष की परिक्रमा का विधान है | इनकी पूजा के भी कई कारण है | आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो वट वृक्ष दीर्घायु व अमरत्व के बोध के नाते भी स्वीकार किया जाता है | मान्यतानुसार व्रत को रखने से पति पर आए संकट टल जाते हैं और वे दीर्घायु होते हैं। यही नहीं अगर दांपत्य जीवन में कोई परेशानी चल रही हो तो वह भी इस व्रत के प्रताप से दूर हो जाते हैं।

शनिदेव जयंती एवं वट सावित्री व्रत का पर्व शुक्रवार को मनाया जा रहा है । श्रद्धालु विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए प्रयास करेंगे शनि जयंती हिंदू पंचांग के ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाई जाती है। इस दिन शनिदेव की पूजा की जाती है। विशेषकर शनि की साढ़ेसाती, शनि की ढैय्या आदि शनि दोष से पीड़ित जातकों के लिये इस दिन का महत्व है।