वाराणसी में ये इलाके बने बफरजोन | ज़िलाधिकारी ने बताया क्या होंगे प्रतिबंध | Pandey Haveli हॉटस्पॉट |

वाराणसी में ये इलाके बने बफरजोन | ज़िलाधिकारी ने बताया क्या होंगे प्रतिबंध | Pandey Haveli हॉटस्पॉट || बीती रात पांडेय हवेली से दो कोरोना संदिग्ध मरीज मिलने के बाद शासन के आदेश पर वाराणसी के चारों हॉटस्पॉट एरिया के दो किलोमीटर रेडियस के अंतर्गत आने वाले सभी इलाकों को बफर जोन बनाया जा रहा है। पाण्डेय हवेली पहले ही हॉटस्पॉट एरिया के अंतर्गत में ही है, अब सुरक्षा की दृष्टी से इन सभी हॉटस्पॉट एरिया के आसपास के इलाकों को भी बफर जोन में तब्दील कर दिया गया है।

जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने शहर को हालात के बारे में अपडेट देते हुए कहा है कि वाराणसी में अभी तक केवल 9 पाज़ीटिव केस हैं, इसके अलावा दो केस ऐसे हैं, जिनकी रिपोर्ट आज आऩी है। यह दोनो केस सेकेंड राउंड कंफर्मेटिव टेस्ट आने के बाद ही पता चलेगा, जैसे ही रिपोर्ट आएगी उसे शेयर कर दिया जाएगा।

उन्होंने बाताया कि यह दोनो केस उसी हॉटस्पॉट इलाके के हैं जो मदनपुरा पर पहले से बनाया गया है। पांडेय हवेली का क्षेत्र पहले ही हॉटस्पॉट के बाहर जो बफर क्षेत्र है उसमें शामिल है। मदनपुरा इलाके का हॉटस्पॉट जगमबड़ी से लेकर पाण्डेय हवेली तक बनाया गया है। जिन घरों की सैंपलिंग की गई है, यह उसी में शामिल है |

जिलाधिकारी ने बफरजोन के बारे में स्पष्ट करते हुए बताया कि यह एक हॉटस्पॉट एरिया जैसा ही होता है। हॉटस्पॉट एरिया के आगे जो भी 2 किलोमिटर तक के अंदर आने वाले इलाके हैं, उनपर भी हॉटस्पॉट एरिया के रेस्ट्रिक्शन लागू कर दिये जाते हैं, जो हॉटस्पॉट एरिया में लागू रहते हैं। यह दोनो एरिया ही सीलिंग के अंतर्गत शामिल होते हैं।

बफर जोन बनाने का उद्देश्य यह है कि हॉटस्पॉट के अंतर्गत भी यदि कोई कोरोना पॉजिटीव मरीज बाहर घूमा होगा तो जिन भी गलियों में उसके जाने की संभावना होगा या घूमा होगा, या जिन भी मार्केट में गया होगा, वह सारे एरिया बफरजोन में शामिल कर लिये जाएंगे। बफरजोन एरिया के लोगों को भी सख्ती से सीलडाउन करवाकर आदेश कर दिया जाता है कि घरों से बिलकुल बाहर न निकलें।

बफरजोन के सारे लोगों की मेडिकल स्क्रीनिंग भी करवाई जाती है। इसके साथ ही सर्दी, जुकाम, बुखार की शिकायत वाले मरीजों की टेस्टिंग भी करवाई जाती है। बफरजोन में मेडिकल टीम ज्याद केयर करती है, सभी के सैंपलिंग के लिये। बफरजोन एहतियात के लिये बनाया जाता है कि अगर उस एरिया में भी कोई संदिग्ध मरीज पाया जाए तो पहले ही उसकी सैंपलिंग करवा ली जाये।