उत्तर प्रदेश में ढूंढे नहीं मिल रहे मजदूर, बड़ी परियोजनाओं का निर्माण कार्य ठप

कोरोना वायरस के मदेनजर मजदूरों पे बहुत बड़ी आफत है ,देश के हरेक कोने में मजदुर फसे हुए है। सरकार की नींद बहुत देर में खुली मजदूरों को घर ले जाने में। वही कोरोना वायरस के चलते बहुत से निर्माण कार्य ठप है।

उत्तर प्रदेश में ढूंढे नहीं मिल रहे मजदूर, बड़ी परियोजनाओं का निर्माण कार्य ठप
निर्माणकार्य ठप

 

वही एक ख़बर अब उत्तर प्रदेश से है यही भी कई निर्माण कार्य ठप है इसकी वजह मजदुर है , जो मजदुर वहाँ काम करते थे अब वो घर के लिए निकल गए है। और निर्माण कार्य बंद हो चूका है।  इससे आउटर रिंग रोड सहित शहर की अन्य बड़ी परियोजनाओं का निर्माण कार्य शुरू करने के लिए अब मजदूर ढूंढे नहीं मिल रहे है।

एनएचएआई ने शहरवासियों को ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए 104 किलोमीटर लंबी आउटर रिंग रोड का निर्माण कर रहा है, लेकिन कोरोना लॉकडाउन के कारण 20 मार्च में सभी निर्माण कार्य रोक दिये गये। इसके बाद पिछले दिनों केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखकर कुछ मानकों के साथ बड़ी परियोजनाओं के निर्माण कार्यों को मंजूरी दे दी, लेकिन लॉकडाउन के दौरान मजदूरों का पलायन बड़ी तेजी से हुआ। नतीजतन अब निर्माणकार्य शुरू करने में दिक्कत आ रही है।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक एनएन गिरि ने बताया कि आउटर रिंग रोड का निर्माण कार्य चार चरणों हो रहा है। अभी सिर्फ फैजाबाद रोड से सुलतानपुर रोड के बीच निर्माण कार्य शुरू किया जा सका है। इसके अलावा फैजाबाद रोड से सीतापुर रोड, हरदोई रोड से सीतापुर रोड, हरदोई रोड से कानपुर रोड निर्माण कार्य ठप है, क्योंकि लेबर, मिस्त्री की कमी की वजह से काम शुरू होने में अड़चन आ रही है। उन्होंने बताया कि लगभग 80 प्रतिशत मजदूर गांव चले गये हैं। अब वो बारिश के बाद ही शहर का रूख करेंगे। ऐसे में निर्माणकार्य शुरू करना बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य देरी से शुरू होने से बजट भी बढ़ जाएगा।