शिक्षकों की सैलरी रोकी तो रद होगी स्कूलों की मान्यता

बीएसए ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर विद्यालयों ने अपने शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन रोका या कटा तो विद्यालयों की मान्यता समाप्त कर दी जाएगी। कुछ दिनों से ये शिकायतें आ रही थी कि लॉकडाउन के दौरान कई स्कूलों ने अपने शिक्षकों व कर्मचारियों का वेतन रोक दिया है।

शिक्षकों की सैलरी रोकी तो रद होगी स्कूलों की मान्यता

 

शुल्क की वसूली न होने का हवाला देते हुए कई स्कूलों ने अपने स्टॉफ को तीस से पचास फीसद काट कर सैलरी का भुगतान किया है। इसे लेकर शिक्षकों व कर्मचारियों में रोष है। उन्होंने इसकी शिकायत जिला प्रशासन व शिक्षाधिकारियों से भी की है। बीएसए ने इसे गंभीरता से लिया है और वेतन न देने वाले विद्यालयों को मान्यता समाप्त करने की चेतावनी दी है।

सरकार की ओर से लॉकडाउन की अवधि में निजी स्कूलों को फीस नहीं लेने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार के इस निर्देश के बाद अब निजी स्कूलों ने स्टाफ का वेतन रोकने या इसमें कटौती शुरू कर दी है। लेकिन स्टाफ की सेलेरी रोकने पर सरकार के पास निजी स्कूल की मान्यता वापस लेने का अधिकार है। गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम 1989 एवं नियम 1993 में सरकार को अधिकार प्राप्त है कि वह संस्था की मान्यता वापस ले सकती है।
 

वेतन काटने व रोकने की ज्यादातर शिकायतें जूनियर हाईस्कूल स्तर के विद्यालयों की आ रही हैं। इन विद्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों का कहना है कि वेतन के रूप में पांच से दस हजार रुपये में प्रतिमाह मिलता है। इसी पैसे में परिवार का भी भरण-पोषण करना होता है। यदि वेतन रोक दिया जाए या काट कर भुगतान किया जाता है तो उनके लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भारी पड़ेगा। वहीं शिक्षकों को नाम उजागर होने पर उन्हें नौकरी जाने का भी भय सता रहा है। बहरहाल बीएसए राकेश सिंह ने ऐसे विद्यालयों को नोटिस दी है और जांच करा रहे हैं। इसमें सभी विद्यालय से कार्यरत समस्त शैक्षणिक, गैर शैक्षणिक स्टाफ का वेतन, मानदेय एवं अन्य देय जो भी शेष है उसे तत्काल संबंधित के खाते में स्थानान्तरित करने निर्देश दिया है। शिकायत मिलने पर विद्यालय की मान्यता प्रत्याहरण की कार्यवाही करने की चेतावनी दी है। लेकिन यह तभी संभव हो सकेगा, जब सेलेरी नहीं मिलने पर शिक्षक सरकार को शिकायत के लिए आगे आएंगे।