शराब की दूकान खुलते ही बढ़ी महिलाओ के ऊपर हिंसा

कोरोनावायरस से लोगो को बचने के लिए और इसका संक्रमण को रोकने के लिए किए सरकार ने 3 बार लाकडाउन लगाया ताकि स्थति को सम्हाल सके इस बीच सभी दुकाने और आवागमन बंद रखे गए लोगो को कई शर्तो के साथ घरो से निकलना था |

शराब की दूकान खुलते ही बढ़ी महिलाओ के ऊपर हिंसा

 

सरकार ने आम जनता के सहुलियत के लिए फेज लाकडाउन 3 में कई रियायते और छूट दी जो काफी हद तक जनता के लिए मददगार रही लेकिन राशन व अन्य जरुरी वस्तुवो के दुकाने 10 से 5 तक व शराब की दुकाने 10 से 7 खोलना ये कुछ समझ नहीं आया|  अब इसमें कितना जनता का भला है और कितना सरकार का फायदा ये पता नहीं लेकिन शराब की दुकाने खुलते ही घरों में हो रही मारपीट व घरेलू हिंसा के आकड़ों में अचानक इजाफा हो गया है। जी हां जहाँ एक ओर सरकार ने लोगो को कोरोना से बचाने  के लिए 3 बार लाकडाउन लगाया ताकि सब इस संक्रमण से बच सके वही सायद सरकार ने महिलाओ के बारे में गंभीरता से नहीं सोचा तभी तो राशन की दुकाने 10 से 5 और शराब की दुकाने 10 से 7 खोलने का आदेश जारी किया है | आज जो महिलाओ के ऊपर हिंसा हो रही है वो कोई नई बात नहीं है | ज्यादातर घरेलु हिंसा में शिकायते आती है जिसमे पुरुष के द्वारा नशे में महिला के साथ मारपीट का मामला होता है |

एक समाचार पत्रिका के अनुसार जिले में रोजाना करीब 500 डायल 112 पीरआरवी पर सूचनाएं प्राप्त होती है। बीते  दो मई को कुल सूचनाएं प्राप्त 440 जिनमें घरेलू हिंसा संबधित 29 हैं। तीन मई को कुल प्राप्त सूचनाएं 385 जिनमें सिर्फ 17 सूचनाएं घरेलू से संबधित हैं। वहीं, चार मई को लॉकडाउन तीन के पहले दिन शराब की दुकाने खुलने के बाद कुल सूचनाएं प्राप्त 499 हैं जिनमें महिलाएं हिंसा की सूचनाएं 51 है। पांच मई को कुल 339 में से 38 सूचनाएं महिला हिंसा की है। अब ये आकड़े तो वे है जो पुलिस तक पहुंचे हैं जबकि हकीकत में बहुत सी महिलाए अपने ऊपर हुवे हिंसा की शिकायत ही नहीं करती तो अब आप ही सोचिये अगर सभी महिलाओ ने अपने ऊपर हुवे हिंसा की शिकायत की होती तो आकड़े शायद हमारे सोच से परे हो| लाकडाउन में लोग सामने आ कर सरकार से मदद मांग रहे थे की खाने को पैसे नहीं लेकिन जैसे ही शराब की दुकाने खुली ना जाने कहा से इनके पास पैसे आ गए केवल वाराणसी की बात कर ,ले तो मात्र 2 दिन में करीब 6.5 करोड़ के शराब बनारसी पि गए|  शराब की दुकानों के खुल जाने से अब महिलाओ को केवल शारीरिक हिंसा ही नहीं, बल्कि मानसिक और आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है।जब शराब की दुकाने खोली जा रही थी तो शर्त ये थी कि दुकानों पर शारीरिक दूरी का पालन कराना होगा, नहीं तो दुकान को सीज कर दिया जाएगा।  लेकिन शराब की दुकानों पर उमड़ी भीड़ न्र सभी कायदे कानून की धज्जिया उड़ा दी | दुकानों को सील करने की बात तो छोड़िये प्रसाशन भी इनके सामने लाचार नजर आ रही है | महिलाओ पर बढ़ते हिंसा हो देखते हुवे एक बार सरकार को अपने इस फैसले पर एक बार गौर करना चाहिए की क्या शराब की दुकानों को 10 से 7 और राशन की दुकानों को 10 से 5 खोलना ठीक है |