एक तरफ मज़दूर पैदल चलने को मजबूर दूसरी तरफ बसों को ले कर सियासी जंग

एक तरफ जहा मजदूर घरो को वापस लौटने के लिए पैदल ही निकल पड़े है और दुर्घटना के शिकार हो जा रहे है और वही दूसरी तरफ प्रवासी मजदूरों को लेकर सरकार आपस में राजनीति कर रहे है |

एक तरफ मज़दूर पैदल चलने को मजबूर दूसरी तरफ बसों को ले कर सियासी जंग
बसों को ले कर सियासी जंग

 

बतादे की कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच इस वक्त मजदूरों के लिए बसे चलाने को ले कर खींचतान बढ़ती जा रही है।  दरअसल कुछ समय पहले प्रियंका गांधी ने प्रवासी श्रमिकों के लिए 1000 बसें भेजने के लिए प्रदेश सरकार से अनुमति मांगी थी। इसके बाद जो हुवा उससे बसे तो अभी चली नहीं बल्कि इससे यूपी की सियासत गरमा गई है।बतादे योगी सरकार का आरोप है कि कांग्रेस से बसों का डीटेल मांगा गया था, लेकिन अब तक कांग्रेस ने डिटेल नहीं दी | 

वही प्रियंका गांधी का कहनाहै की यूपी सरकार उन्हें बसें चलाने के अनुमति नहीं दे रही है।साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्रवासी मजदूरों की मदद नहीं करना चाहती इसलिए वो श्रमिकों को उनके घर तक ले जाने के लिए दिल्ली-उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर खड़ी 1000 बसों को दस्तावेज समेत लखनऊ भेजने की मांग कर रहे है जो प्रदेश सरकार की एक राजनीति  है।

बतादे सोमवार को UP सरकार ने प्रियंका के कार्यालय से 1000 बसों और चालकों के विवरण मांगी थी वही आज  मंगलवार को प्रियंका गांधी ने एक बार फिर से आगरा के बॉर्डर पर बसें लगा दीं है |

 इसके साथ ही आप को बतादे कांग्रेस महासचिव के निजी सचिव संदीप सिंह ने उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी को पत्र लिखकर कहा, 'जब हजारों मजदूर पैदल चल रहे हैं और हजारों की भीड़ पंजीकरण केंद्र पर उमड़ी हुई है तब सिर्फ खाली बसों को लखनऊ भेजना न सिर्फ समय की बर्बादी है, बल्कि हद दर्जे की अमानवीयता भी है।' ख़ैर कांग्रेस और योगी सरकार के बीच तो अब भी बसों को ले कर तनातनी चल रही है अब तक तो बसें  चल नहीं पाईं लेकिन मजदुर अब भी मजबूर है पैदल चलने को अब देखना है की ये सियासी जंग कब ख़त्म होगा बसे कब चलेंगी और मजदुर का यु पैदल घर के लिए चलना कब थमेगा |