दुनियाभर में पानी से सस्ता हुआ कच्चा तेल |

कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया भर में भारी आर्थिक संकट पैदा कर दिया है| दुनिया भर के कई शहर, फैक्ट्रियां, ट्रांस्पोर्टेशन और अभी तरह के उद्द्योग पूरी तरह बंद है| कोरोना प्रकोप के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। रविवार शाम कच्चे तेल की कीमत 21 सालों के न्यूनतम स्तर पर गिरकर 15 डॉलर प्रति बैरल के भी नीचे आ गई है| तेल मांग में आई भारी गिरावट और तेल स्टोरेज के लिए पैदा हुई समस्याओं के कारण तेल की कीमतों में यह गिरावट दर्ज की गई है।

दुनियाभर में पानी से सस्ता हुआ कच्चा तेल |

 

 कच्चे तेल का ग्लोबल स्टोरज इस समय अपनी सीमा तक भर गया है। इस भारी गिरावट के बाद दुनियाभर में कच्चा तेल पानी से भी सस्ता हो गया है| तेल की कीमतों में पिछले सप्ताह से ही लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।

मौजूदा रेट के मुताबिक एक लीटर कच्चा तेल सिर्फ 7 रुपये में बिक रहा है| एक बैरल कच्चा तेल भारतीय रुपये में 1140 रुपये का पड़ रहा है| एक बैरल में 159 लीटर होते हैं|  इस तरह से देखें तो एक लीटर क्रूड का दाम 7.13 रुपये प्रति लीटर से भी कम पड़ रहा है|  वहीं अगर, देश में पैकेज्ड पानी की एक बोतल का दाम देखें तो 20 रुपये है| आपको बता दें कि भारत अपनी जरूरत के 83 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है और इसके लिए इसे हर साल 100 अरब डॉलर देने पड़ते हैं| कमजोर रुपया भारत का आयात बिल और बढ़ा देता है जिसकी भरपाई के लिए सरकार कच्चे तेल पर टैक्स दरें ऊंची रखती है|  

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के कारण दुनिया के कई देशों में औद्योगिक गतिविधियां बाधित रहने के चलते आई खपत में भारी कमी के कारण लंबे समय से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है। अंतर्राष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड ऑयल डब्ल्यूटीआई का भाव रविवार शाम करीब 21 फीसद की गिरावट के साथ 14.47 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि ब्रेंट ऑयल इस समय 4.2 फीसद की गिरावट के साथ 26.91 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेंड कर रहा था।

4.1 प्रतिशत गिरकर 26.93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, हालांकि बाद में इसमें थोड़ा सुधार हुआ और यह 28.11 डॉलर के भाव पर था|  हाल के सप्ताहों में लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंधों के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की मांग घटी है|

एक रिपोर्ट का अनुमान है कि अगर लॉक डाउन की अवधि ऐसे ही बढ़ती है  और औद्योगिक गतिविधियां बाधित रही तो ओपेक प्लस देशों की बैठक लंबे समय के लिए टल जाती है तो कच्चे तेल की तेल की कीमतें 10 डॉलर तक पहुंच सकती है|