जौनपुर पहुंचे यूपी-बिहार के मजदूर का आरोप 710 रुपये किराया दिया और खाने को 24 घंटे में सिर्फ एक बार खिचड़ी मिली

इन दिनों कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन 3 का दौर है। लॉकडाउन 2 की मियादे ख़तम होने के बाद लॉकडाउन 3 में बहुत सारी छूट भी मिली। इसके साथ ही मजदूरों के किराये को लेकर भी तमाम राजनीती भी आपने चरम पर है।

जौनपुर पहुंचे यूपी-बिहार के मजदूर का आरोप 710 रुपये किराया दिया और  खाने को 24 घंटे में सिर्फ एक बार खिचड़ी मिली

आरोप प्रत्यारोप का ये दौर कोई नया नहीं है भारतीय राजनीती में पर पहली बार मजदूरों का मुदा भी उठ रहा है भले वो घर वापसी का ही क्यों न हो। 

लॉकडाउन में फंसे मजदूरों को स्पेशल ट्रेन से घर भेजने पर किराया माफी को लेकर गरमाई सियासत की हकीकत इस ट्रेन के यात्रियों ने उजागर कर दी है। सोमवार की देर रात अहमदाबाद से जौनपुर पहुंची ट्रेन के यात्रियों ने किराया माफी के दावों को खारिज कर दिया। मजदूरों ने बताया कि उनसे अहमदाबाद से जौनपुर की यात्रा के लिए 710 रुपये लिए गए।


इसमें से 60 रुपये रास्ते में खाना-पानी के लिए था, लेकिन 24 घंटे के सफर में उन्हें एक बार खिचड़ी और दो बोतल पानी ही दिया गया। ट्रेन का टिकट 630 रुपये का है, जबकि यात्रियों से 710 रुपये लिए गए। उन्हें यह बताया गया था कि बाकी पैसे से रास्ते में खाने की व्यवस्था होगी।

यूपी-बिहार के कई जिलों के 1250 यात्री इस स्पेशल ट्रेन से रात करीब पौने एक बजे जौनपुर जंक्शन स्टेशन पहुंचे। रेलवे वाराणसी मंडल के अधिकारियों के साथ ही डीएम दिनेश कुमार सिंह, सीडीओ अनुपम शुक्ल, एसडीएम नीतीश कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट सहदेव मिश्र सहित अन्य अफसर भारी फोर्स और स्वास्थ्य टीम के साथ पहले ही मौजूद रहे।

स्पेशल ट्रेन से यात्रा करने वाले मजदूरों ने लॉकडाउन के कारण परदेश में होने की दुश्वारियों का जिक्र किया तो उनके गले रुआंसे हो गए। कई यात्रियों के पास ट्रेन का किराया चुकाने को भी पैसे नहीं थे। अन्य सहयोगियों से उधार लेकर उन्होंने ट्रेन का टिकट खरीदा।