मणिकर्णिका घाट के जमीन को क्यों बताया जा रहा है फर्जी |

शहर में बढ़ती जमीन की कीमतों की वजह से पिछले चार दशक में बड़े पैमाने पर राजस्व और नगर निगम के कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा किया गया। इसमें बहुत से मामले जिनका खुलासा हुआ उसमें देखने में आया कि अधिकतर फर्जी दस्तावेज जो तैयार हुए वे करीब 1374 फसली वर्ष (सन 1965) के पहले की फर्जी वसीयत के आधार पर हुए थे।

शहर में बढ़ती जमीन की कीमतों की वजह से पिछले चार दशक में बड़े पैमाने पर राजस्व और नगर निगम के कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा किया गया। इसमें बहुत से मामले जिनका खुलासा हुआ उसमें देखने में आया कि अधिकतर फर्जी दस्तावेज जो तैयार हुए वे करीब 1374 फसली वर्ष (सन 1965) के पहले की फर्जी वसीयत के आधार पर हुए थे। मणिकर्णिकाघाट की नजूल भूमि के लिए दस्तावेजों में जो छेड़छाड़ की गई उसमें 1374 फसली को नजरअंदाज करते हुए अंग्रेजों के जमाने के फर्जी दस्तावेज और कूट रचना कर दी गई। इस प्रकार फर्जीवाड़ा करने वालों ने शक होने की सभी संभावना को समाप्त करने का प्रयास किया था।