लॉक डाउन के चलते परिजनों के ना पहुंचने पर पुलिसकर्मियों ने किया अंतिम संस्कार |

कोरोना के मद्देनजर हुए देशव्यापी लॉक डाउन में देश के अलग-अलग कोनों में लगभग लाखों लोग फंसे हैं जो अपने घर-परिवार से दूर हैं। कोई साधन ना होने की वजह से वह अपने परिवार तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।लेकिन इन हालातों में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो इन दूरियों को नामंजूर करते हुए पैदल ही अपने घर की तरफ रुख कर रहे हैं।ऐसा ही एक मामला सामने आया जब दिल्ली में 45 वर्षीय

लॉक डाउन के चलते परिजनों के ना पहुंचने पर पुलिसकर्मियों ने किया अंतिम संस्कार |

 

ट्रक चालक ने बेगूसराय स्थित अपने घर के लिए पैदल ही निकल पढ़े।जो पैदल ही दिल्ली से वाराणसी तक तो पहुच गया लेकिन दुर्भाग्यवश वाराणसी के मोहनसराय सराय इलाके में नेशनल हाईवे पर वह गिर पड़ा और गंभीर रूप से घायल हो गया।

जिसकी सूचना पर एंबुलेंस कर्मी तो आए लेकिन कोरोना के भय से और सुरक्षा किट ना होने के कारण घायल को हाथ तक लगाने से इनकार कर दिया।जिसके बाद लगभग वह 1 घंटे तक तड़पता  रहा और अंततः उसकी मृत्यु हो गई। इस पर रोहनिया थाना क्षेत्र के मोहनसराय चौकी इंचार्ज गौरव पांडे ने बताया कि कोरोना के जांच के चलते सोमवार तक शव का पोस्टमार्टम हुआ।और परिजनों को खबर दे दी गई है।

इस दौरान राम जी के पार्थिव शरीर से मिले परिजनों के मोबाइल नंबर पर संपर्क कर प्रशासन ने खबर दी लेकिन कोरोना की कहर ने परिजनों से राम जी के अंतिम दर्शन और क्रिया करम का हक भी छीन लिया।कोरोना के मद्देनजर हुए लॉक डाउन से पूरे देश में एक जगह से दूसरी जगह जाना बहुत ही मुश्किल  है ऐसे में राम जी के माता-पिता का पैसे के अभाव और लॉक डाउन की स्थिति में वाराणसी आना असंभव रहा और वह नहीं पहुंच सके।इसके साथ ही बहन,पंजाब में रहने वाले भाई आदि परिजनो ने भी लॉक डाउन का हवाला देते हुए बनारस आने से इनकार कर दिया।पर इन हालातों में भी वाराणसी पुलिस प्रशासन ने मृतक के परिजनों की जिम्मेदारी भी न सिर्फ ली बल्कि बखूबी निभाई भी।रामजी महतो के परिजनों के वाराणसी ना पहुंच पाने के वजह से हरिश्चंद्र घाट ले जाकर अंत्येष्टि कराई। कोरोना  के इस विकट संकट में हमारे नौजवान सुरक्षाकर्मी, पुलिस प्रशासन की सूझबूझ, समझदारी और तत्परता वाकई सराहनीय है।