लाकडाउन में मजदूर बैलगाड़ी खींचने को मजबूर

कोरोना वायरस से जनता को बचाने के लिए लाकडाउन लगाया गया है| लेकिन इस लाकडाउन में गरीबो का बहुत नुकसान हुवा सबसे ज्यादा उन्हें जो अपने गांव घर से दूर है दूसरे शहर में खा कमा रहे थे और अब इस लाकडाउन में तो उनके पास अब खाने कमाने का का जरिया भी छिन गया है| इसलिए वो अब घर वापसी को मजबूर है |

लाकडाउन में मजदूर बैलगाड़ी खींचने को मजबूर

 

लॉकडाउन में फंसे मजदूर  बस किसी तरह से घर पहुंचना चाहते हैं। जान जोखिम में डालकर भी मजदूर सफर कर रहे हैं। इस लकडाउन के दौरान कुछ  बेबसी की तस्वीरें सामने आ रही है  जो आप को सोचने पर मजबूर कर देंगी की आज मजदुर कितना मजबूर है । इस वक्त सड़कों पर बेबस मजदूर पैदल चलने को मजबूर है । सबके अपने-अपने दर्द हैं, लेकिन सुनाएं तो किसे सुनाएं।  आप को बता दे सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमे घर तक पहुंचने के लिए परिवार के लोग  बैल की जगह खुद बैल बन कर बैलगाड़ी खींच रहे हैं ।

वायरल वीडियो के बारे में बताया जा रहा है कि इंदौर से सटे मंगलिया बाईपास का है।  और ये परिवार महाराष्ट्र से बैलगाड़ी के जरिए राजस्थान स्थित अपने घर जा रहा है। बैलगाड़ी से महाराष्ट्र के राजस्थान के लिए परिवार के 3 लोग निकले थे और रास्ते में 1 बैल की मौत हो गई। उसके बाद परिवार की मुश्किलें बढ़ गई। अब एक ही बैल के सहारे घर पहुंचना है इसलिए बैल की मौत के बाद खुद ही बैलगाड़ी खींचकर घर पहुंचने की कोशिश कर रहा है।

इस चिलचिलाती धूप में बेबस मजदूर परिवार अपनी मंजिल की ओर बढ़ने के लिए बारी-बारी से बैल बनकर गाड़ी को खींच रहे हैं।  कभी पिता, कभी मां और कभी बेटा बैलगाड़ी को खींच रहा है। बेटा थकता है तो गाड़ी मां खींचती है, मां थकती है तो पिता खींचते हैं|

दरअसल, महाराष्ट्र से यूपी, बिहार और राजस्थान लोग इंदौर से होते हुए ही जाते हैं। सैकड़ों मजदूर तो पैदल आकर बिजासन बॉर्डर पर फंसे हैं। हालांकि सरकार की तरफ से उन्हें एमपी की आखिरी सीमा तक बसों से छोड़ने का वादा किया गया है।लेकिन ये तस्वीरें देख कर साफ़ जाहिर है की मजदूर सरकार पर अब भी भरोसा नहीं कर पा रही है या कह सकते है सरकार मजदूरों का भरोसा जीत ही नहीं पा रही |