जीएसटी काउंसलिंग की बैठक कई मायनों में अहम बढ़ सकती है मोबाइल पर जीएसटी की दरें | ZNDM NEWS

दरअसल सरकार इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को बढ़ाना चाहती है| जिससे सरकार  की आमदनी बढ़ सकें | इनवर्टेड ड्यूटी उन चीज़ो पर लगती है जिसके रॉ मटेरियल और कॉम्पोनेन्ट की  GST दरें  ज्यादा होती   है पर फाइनल प्रोडक्ट की GST दरें कम होती  है | जिसके एवज़ में सरकार को  मैनुफक्चरर को refund देना पड़ता है  जिसमे सरकार  का सालाना करीब 25 हज़ार करोड़ रुपये  से ज्यादा खर्च हो जाता है |

आज वस्तु एवं सेवा कर काउंसिल  की  बैठक होने वाली है|  GST काउंसिल की यह बैठक कई मायनों में अहम है| जानकारी के मुताबिक,  GST काउंसिल की बैठक में मोबाइल फोन्स, फुटवियर और टेक्स्टाइल जैसे आइटम्स पर लगने वाले GST को बढ़ाया जा सकता है | ऑटोमोबाइल्स्ट पर लगने वाले सेस को नहीं हटाया जाएगा, लेकिन इसके टैक्स स्ट्रक्चर  डेविएशन को दूर करने पर चर्चा होगी|  


दरअसल सरकार इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को बढ़ाना चाहती है| जिससे सरकार  की आमदनी बढ़ सकें | इनवर्टेड ड्यूटी उन चीज़ो पर लगती है जिसके रॉ मटेरियल और कॉम्पोनेन्ट की  GST दरें  ज्यादा होती   है पर फाइनल प्रोडक्ट की GST दरें कम होती  है | जिसके एवज़ में सरकार को  मैनुफक्चरर को refund देना पड़ता है  जिसमे सरकार  का सालाना करीब 25 हज़ार करोड़ रुपये  से ज्यादा खर्च हो जाता है | मोबाइल फोन्स, फुटवियर और रेडीमेड गार्मेंट्स के मामले में  इनवर्टेड ड्यूटी  बहुत अधिक है| इसके अलावा व्यापारियों को भी बार बार सरकार  से रिफंड लेना पड़ता है जिसमे काफी समय लगता है | इन्ही परेशानियों  करने  सरकार  अब  G ST दरें  बढ़ने  वाली  है |  

इस बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट पर भी  चर्चा विभाग के एक अधिकारी के हवाले से  मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि फेक इनपुट टैक्स क्रेडिट के मामले भी  बढ़ सकते हैं | बता दें कि फेक इनपुट क्रेडिट भी केन्द्र और राज्य स्तर पर टैक्स डिपार्टमेंट के लिए चुनौती बना हुआ है|  हाल के दिनों में इसे लेकर कई जरूरी कदम भी उठाए गए हैं|  वही कार, टोबैको और ऐरेटेड ड्रिंक्स पर लगने वाले सेस को बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, यह बढ़ोतरी इस पर निर्भर करेगी कि राज्यों में इस पर सहमति बने. यह सेस राज्यों को GST से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए लगाया जाता है |