'गायब' हो गए चलती ट्रेन से 338 मजदूर , प्रशासन कर रही तलाश

कोरोना वायरस की वजह से हुवे लाकडाउन की मार सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूरों पर पड़ी है| लाकडाउन की वजह से पहले तो इनकी रोजी रोटी छीन गई अब उनके सामने पेट की भूख की समस्या भी आ खड़ी हुई है|

'गायब' हो गए चलती ट्रेन से 338 मजदूर , प्रशासन कर रही तलाश

 

लेकिन इन गरीब मजदूरों के पास अब कोई रास्ता नहीं बचा है और इसलिए ये मजदुर अब मजबूर हो कर अपने घरो को पैदल निकल गए है | लेकिन इन सबके बीच ये गरीब मजदुर हादसे का शिकार हो जाते है | अब तक कई मजदूरों की जाने जा चुकी है | इन सबको देखते हुवे सरकार ने प्रवासी मजदूरों को उनके घर तक सही सलामत पहुंचाने के लिए बसों व ट्रेनों की सुविधा उपलब्ध करा दी है | और अब ये श्रमिक ट्रेने प्रवासी मजदूरों को लेकर यूपी के अलग-अलग इलाकों में पहुंच रही हैं।

लेकिन इन सबके बीच एक चौकाने वाली खबर आ रही है दरअसल गुजरात के वडोदरा से आई एक ट्रेन से 338 मजदूर लापता हैं।इस ट्रेन में उत्तर प्रदेश के 48 जिलों के 1908 मजदूर थर्मल स्क्रीनिंग के बाद बिठाए गए थे। लेकिन बांदा स्टेशन पर जब ट्रेन से कुल1908 में से 1570 मजदूर ही उतरे तो प्रशासन के होश उड़  गए। अब ऐसे में सवाल उठ रहा है कि 338 मजदूर कहां लापता हो गए? यह मजदूर आखिर कहां चले गए? कहीं वे रास्ते के किसी दूसरे स्टेशन पर तो नहीं उतर गए?  आप को बता दे सबसे बड़ी बात की हैरानी की बात यह है कि इस ट्रेन का और कहीं स्टॉपेज भी नहीं था।

ट्रेन ड्राइवर के मुताबिक़ ट्रेन को कही भी रोका नहीं गया था  ट्रेन को सीधे बांदा में रोका गया | एक समाचार पत्रिका के हिसाब से वडोदरा के एडीएम डीआर पटेल ने सभी मजदूरों की जानकारी और संख्या का लिस्ट बांदा जिला प्रशासन को एक खत भेजा था। बांदा का जिला प्रशासन इस मामले का पता लगाने में जुटा हुआ है।अधिकारियों का कहना है की जल्द से जल्द इस मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश रहेगी| कुछ सूत्रों का कहना है की मजदूरों की गिनती में सायद गलती हुई होगी | लेकिन अब सच्चाई क्या है क्या प्रसाशन से कोई गलती हुई है या मजदुर सच में चलती ट्रेन से गायब है | ये बाते अब तहकीकात के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगी |